कांग्रेस ने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगभग 97 मिनट लंबे भाषण को लेकर तीखा हमला बोला है। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और विपक्ष पर आलोचनात्मक टिप्पणियों के साथ लंबा संबोधन दिया। हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि इतने लंबे भाषण के बावजूद प्रधानमंत्री देश से जुड़े अहम मुद्दों पर कोई ठोस और स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि भाषण में समस्याओं के समाधान की बजाय केवल बयानबाजी और विपक्ष पर हमले देखने को मिले, जिससे जनता की अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं।
खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। इसी के विरोध में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक तनाव और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर सीधी बात करने से परहेज किया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह भाषण संसद से ज्यादा एक राजनीतिक मंच जैसा था, जिसमें तथ्यों के बजाय आरोपों और कटाक्षों पर जोर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गंभीर सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। वहीं राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सच्चाई से बचते नजर आए।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह लंबा भाषण सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नई राजनीतिक बहस का कारण बन गया है। जहां सरकार इसे अपनी उपलब्धियों और नीतिगत स्पष्टता का उदाहरण बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे मुद्दों से भटका हुआ और ठोस जवाबों से खाली भाषण करार दे रही है, जिससे संसद का सियासी माहौल और गर्म हो गया है।




