उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य के मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है और इस मामले में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव तथा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आमने-सामने आ गए हैं। विवाद की पृष्ठभूमि प्रयागराज में आयोजित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े घटनाक्रम से जुड़ी है, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य और संत समाज सनातन परंपरा के प्रतीक हैं और उनके सम्मान से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि संतों से प्रमाण या औपचारिकताएं मांगना सनातन धर्म का अपमान है और राज्य सरकार को इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य को सम्मान देते हुए कहा कि वे “हमारे भगवान” के समान हैं और उनका सदैव स्वागत है। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा प्रमुख का रुख राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है और वह केवल दिखावटी समर्थन दे रहे हैं। मौर्य ने आरोप लगाया कि विपक्ष धर्म और संत समाज के नाम पर राजनीति कर रहा है, जबकि राज्य सरकार संतों के सम्मान और धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
यह पूरा प्रकरण अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर बयानबाजी और तेज हो सकती है। फिलहाल यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के सामने हैं।




