पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और अस्थिर हालात के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबा अल-खालिद अल-अहम अल-मुबारक अल-सबाह से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। इस संवाद का मुख्य फोकस खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने पर रहा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान में विश्वास रखता है तथा क्षेत्र में शांति बहाली के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है।
सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों में बसे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग का आग्रह किया। ओमान और कुवैत के नेतृत्व ने भी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और विदेश मंत्रालय के माध्यम से संबंधित देशों के संपर्क में बनी हुई है।
इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा है। दुबई समेत कई प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों में व्यवधान की स्थिति बनी, जिससे कुछ भारतीय नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ा। हालांकि, समन्वित प्रयासों के बाद सीमित उड़ान संचालन फिर से शुरू हुआ। दुबई से 23 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी हुई, जिन्होंने घर लौटने पर राहत व्यक्त की। इन यात्रियों में पर्यटक और कामकाजी लोग शामिल थे, जो अस्थायी रूप से फंस गए थे।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां की गई हैं। भारतीय दूतावासों और कांसुलर सेवाओं को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही, विभिन्न राज्यों ने भी अपने नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत संतुलित और संयमित रुख अपनाते हुए शांति और स्थिरता की दिशा में प्रयासरत है। प्रधानमंत्री मोदी की हालिया बातचीत को इसी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना है।




