नई दिल्ली: महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) को लेकर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच भेदभाव पर Supreme Court of India ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें DA के भुगतान में किसी प्रकार का अनुचित अंतर नहीं कर सकतीं और समानता के सिद्धांत का पालन करना अनिवार्य है।
दरअसल, यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है जिनमें आरोप लगाया गया था कि कुछ राज्य सरकारें कार्यरत कर्मचारियों को महंगाई भत्ता तो बढ़ा रही हैं, लेकिन पेंशनभोगियों को उसी अनुपात में लाभ नहीं दिया जा रहा। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेंशनभोगी भी सरकार के पूर्व कर्मचारी हैं और उन्हें भी समान आर्थिक सुरक्षा का अधिकार है।
अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि DA का उद्देश्य महंगाई के प्रभाव को संतुलित करना है, ऐसे में यह लाभ सभी पात्र वर्गों को समान रूप से मिलना चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशनभोगियों के साथ अलग व्यवहार करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के खिलाफ हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे अपनी नीतियों की समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि महंगाई भत्ते के मामले में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच किसी तरह का भेदभाव न हो। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी राज्य में इस तरह का अंतर पाया जाता है, तो उसे तत्काल ठीक किया जाए।
इस फैसले से देशभर के लाखों पेंशनभोगियों को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि DA में बढ़ोतरी का लाभ रिटायर्ड कर्मचारियों को भी समान रूप से दिया जाए। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राज्यों पर इस दिशा में ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में सरकारी नीतियों को अधिक न्यायसंगत और संतुलित बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही यह फैसला कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




