राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। इस प्रस्तावित नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को बड़े पैमाने पर आर्थिक प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है, जिससे आम लोगों के लिए EV अपनाना अधिक किफायती और आकर्षक बन सके। सरकार ने इस ड्राफ्ट पर जनता, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं, ताकि अंतिम नीति को और प्रभावी बनाया जा सके।
नई EV पॉलिसी का मुख्य फोकस दिल्ली में प्रदूषण कम करना और पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है। इसके लिए “स्क्रैपेज आधारित मॉडल” को प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत जो लोग अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप कर नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदेंगे, उन्हें अतिरिक्त लाभ मिलेगा। प्रस्ताव में इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर करीब 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी देने की बात कही गई है, जबकि टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर जैसे अन्य वाहनों पर भी अलग-अलग प्रोत्साहन का प्रावधान है।
इसके अलावा, EV खरीदने वालों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रस्ताव है, जिससे वाहन की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह कदम खासतौर पर मध्यम वर्ग के लिए राहतकारी साबित हो सकता है, जो अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों की ऊंची कीमत के कारण उन्हें अपनाने में हिचकिचाते रहे हैं। साथ ही, BS-IV या उससे पुराने वाहनों को हटाने के लिए सख्त नियम लागू करने की योजना है, जिससे प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
नई नीति में केवल निजी वाहनों पर ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने और पूरे शहर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम करने की योजना बना रही है। आने वाले वर्षों में हजारों चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि EV उपयोगकर्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, EV पॉलिसी 2026 का यह ड्राफ्ट दिल्ली को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में अग्रणी बना सकता है। यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो न केवल प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन प्रणाली की दिशा में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।




