अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि इस्राइल और लेबनान के बीच लागू संघर्ष विराम को अगले तीन हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। व्हाइट हाउस में दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद ट्रंप ने इसे “ऐतिहासिक बैठक” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह विस्तार क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और स्थायी शांति की संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।
इस्राइल और लेबनान के बीच यह संघर्ष विराम मूल रूप से अप्रैल के मध्य में लागू किया गया था, जब सीमा पर बढ़ते तनाव, हवाई हमलों और हिजबुल्लाह के साथ झड़पों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था। अमेरिका की मध्यस्थता से हुए इस समझौते ने तत्काल हिंसा को रोकने में मदद की, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। ऐसे में संघर्ष विराम का यह विस्तार दोनों पक्षों को बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देगा।
व्हाइट हाउस में हुई बैठक में अमेरिकी प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी, इस्राइल और लेबनान के राजनयिक तथा सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका लेबनान की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में सहयोग करेगा, ताकि वह अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रख सके। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के साथ अलग-अलग स्तर पर और वार्ताएं हो सकती हैं।
हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। लेबनान ने दक्षिणी लेबनान से इस्राइली सेना की वापसी, बंदियों की रिहाई और सीमा निर्धारण जैसे मुद्दों को आगे की बातचीत के लिए महत्वपूर्ण बताया है। वहीं, हिजबुल्लाह ने किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता पर आपत्ति जताते हुए इस्राइली सैन्य उपस्थिति को उकसावे वाला कदम करार दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तीन सप्ताह का विस्तार केवल अस्थायी राहत नहीं, बल्कि लंबे समय से तनावपूर्ण रहे इस्राइल-लेबनान संबंधों में संवाद का दुर्लभ अवसर है। यदि इस अवधि में सकारात्मक प्रगति होती है, तो पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण रास्ता खुल सकता है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस संवेदनशील लेकिन उम्मीदों से भरी कूटनीतिक पहल पर टिकी हुई हैं।



