विकास के साथ बढ़ा जहर, देश में हर साल निकल रहा करोड़ों टन विषैला कचरा

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भारत में पर्यावरणीय संकट तेजी से गहराता जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और पर्यावरण मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल करीब 1.566 करोड़ टन खतरनाक और जहरीला औद्योगिक कचरा उत्पन्न हो रहा है। यह आंकड़ा भारत के औद्योगिक विस्तार की कहानी तो बताता है, लेकिन साथ ही पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर चेतावनी भी देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस कचरे के प्रबंधन और निस्तारण पर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में इसका असर और अधिक खतरनाक हो सकता है।

देश में उत्पन्न होने वाले इस जहरीले कचरे में रासायनिक अवशेष, भारी धातुएं, औद्योगिक कीचड़, जहरीले तरल पदार्थ, उपयोग किया गया तेल और ई-वेस्ट प्रमुख रूप से शामिल हैं। रसायन, पेट्रोकेमिकल, फार्मास्युटिकल, धातु, चमड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग इसके मुख्य स्रोत हैं। इन अपशिष्टों में मौजूद विषैले तत्व मिट्टी की गुणवत्ता को खराब कर सकते हैं, भूजल को प्रदूषित कर सकते हैं और जल स्रोतों को लंबे समय तक प्रभावित कर सकते हैं। इतना ही नहीं, इनका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर, श्वसन रोग, त्वचा संबंधी समस्याएं और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

हालांकि, सरकार ने Hazardous and Other Wastes (Management and Transboundary Movement) Rules के तहत खतरनाक कचरे के प्रबंधन के लिए सख्त नियम बनाए हैं। इसके अलावा, उपयोग किए गए तेल और अन्य विशेष श्रेणी के अपशिष्ट के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) व्यवस्था भी लागू की गई है। इसके बावजूद, कई राज्यों और औद्योगिक क्षेत्रों में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था अभी भी अपर्याप्त है। अवैध डंपिंग, खुले में निपटान और निगरानी की कमी समस्या को और गंभीर बना रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। प्रभावी निगरानी, आधुनिक तकनीक, उद्योगों की जवाबदेही और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता बेहद जरूरी है। साथ ही, आम नागरिकों को भी अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा। भारत के लिए यह सिर्फ पर्यावरणीय चुनौती नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह जहरीला कचरा देश के विकास की राह में बड़ी बाधा बन सकता है।

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