रूस-आर्मेनिया संबंधों में नई दरार, पुतिन ने दी सख्त राजनीतिक चेतावनी

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रूस और आर्मेनिया के बीच संबंधों में हाल के दिनों में तनाव काफी बढ़ गया है। इसकी मुख्य वजह आर्मेनिया का यूरोपीय संघ (EU) के साथ बढ़ता सहयोग और पश्चिमी देशों के करीब जाने की कोशिश मानी जा रही है। रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) ने आर्मेनिया को स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि उसने यूरोपीय संघ के साथ अपनी नजदीकियां और बढ़ाईं, तो उसे आर्थिक और राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। रूस और उसके सहयोगी देशों ने यह भी इशारा किया है कि ऐसी स्थिति में आर्मेनिया की EAEU सदस्यता निलंबित करने जैसे कदमों पर विचार किया जा सकता है। इस चेतावनी को क्षेत्रीय राजनीति में एक गंभीर संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी आर्मेनिया को अप्रत्यक्ष रूप से कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि पश्चिमी संस्थाओं की ओर झुकाव ऐसे हालात पैदा कर सकता है, जिनसे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़े। उन्होंने संकेत दिया कि रूस-समर्थित आर्थिक और सुरक्षा ढांचे तथा यूरोपीय संघ की दिशा में एक साथ आगे बढ़ना व्यवहारिक नहीं माना जा सकता। पुतिन ने यह सुझाव भी दिया कि आर्मेनिया को अपने दीर्घकालिक भू-राजनीतिक भविष्य को लेकर स्पष्ट फैसला करना होगा और जरूरत पड़ने पर जनता की राय भी ली जा सकती है।

दरअसल, 2023 में नागोर्नो-कराबाख संकट के बाद आर्मेनिया और रूस के रिश्तों में दरार अधिक स्पष्ट रूप से सामने आई। आर्मेनियाई नेतृत्व ने आरोप लगाया कि संकट के दौरान रूस ने अपेक्षित सुरक्षा सहयोग नहीं दिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान की सरकार ने यूरोप और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर जोर देना शुरू किया। इसी क्रम में आर्मेनिया ने यूरोपीय संघ के साथ राजनीतिक और आर्थिक सहयोग मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे मॉस्को की चिंताएं गहरी हो गईं।

रूस की चिंता केवल राजनीतिक प्रभाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक और ऊर्जा हित भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मॉस्को ने संकेत दिया है कि यदि आर्मेनिया यूरोप की ओर अपने झुकाव को जारी रखता है, तो उसे रूस से मिलने वाली रियायती गैस, तेल और अन्य आर्थिक सुविधाओं में कटौती का सामना करना पड़ सकता है। चूंकि आर्मेनिया की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस पर निर्भर करता है, इसलिए ऐसी किसी भी कार्रवाई का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था और घरेलू हालात पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा विवाद केवल रूस और आर्मेनिया के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण काकेशस क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है। एक ओर रूस इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर आर्मेनिया पश्चिमी देशों के साथ संबंध मजबूत कर अपनी सुरक्षा और आर्थिक विकल्पों को विविध बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं तथा क्षेत्रीय राजनीति पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

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