‘दुनिया का भरोसा बढ़ा’, Semicon India 2026 में पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर मिशन पर दिया जोर

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 के पांचवें संस्करण का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है और देश को लेकर वैश्विक भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। 17 से 19 सितंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन का मुख्य विषय ‘Silicon to Systems: Building the Ecosystem’ है। सम्मेलन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़ी कंपनियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थानों और नीति निर्माताओं की भागीदारी हो रही है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की बढ़ती वैश्विक विश्वसनीयता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में निवेश, तकनीक और विनिर्माण के क्षेत्र में माहौल तेजी से बदल रहा है। उन्होंने हाल में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन और नई दिल्ली घोषणा का भी संदर्भ दिया। पीएम मोदी के अनुसार, BRICS घोषणा को सर्वसम्मति से स्वीकार किया जाना भारत में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास का एक संकेत है। उन्होंने जापान द्वारा भारत की सॉवरेन रेटिंग में किए गए सुधार का भी उल्लेख करते हुए इसे वैश्विक भरोसे में वृद्धि से जोड़कर बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा अब केवल योजना और निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश वास्तविक उत्पादन और एक व्यापक आपूर्ति श्रृंखला की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में ऐसी प्रगति की है, जिसे आम तौर पर हासिल करने में अधिक समय लगता है। उन्होंने इसे सेमीकंडक्टर यात्रा का दूसरा चरण बताया और कहा कि चिप निर्माण एक लगातार आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया है, जिसमें नई तकनीक और क्षमता का विकास निरंतर जारी रखना होगा।

भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने देश की प्रतिभा, तकनीकी क्षमता, डिजिटल बुनियादी ढांचे और बढ़ते विनिर्माण आधार को प्रमुख ताकतों के रूप में सामने रखा। सेमीकंडक्टर उद्योग में डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग, परीक्षण और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। SEMICON India 2026 में भी इसी व्यापक दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया जा रहा है, जहां ‘Sand to Silicon to Systems’ के जरिए सेमीकंडक्टर की पूरी यात्रा को एक साथ दिखाया गया है।

सरकार की ओर से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अगले चरण की रणनीति के तहत Semicon 2.0 पर भी जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कार्यक्रम में बताया कि Semicon 2.0 के तहत भारत में कम से कम 200 चिप डिजाइन स्टार्टअप और कंपनियों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही करीब एक लाख तकनीशियनों को तैयार करने की योजना है, ताकि सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सके।

Semicon 2.0 को छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित किया गया है। इनमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और सामग्री, नई फैब्रिकेशन इकाइयों की स्थापना, एडवांस्ड पैकेजिंग और ATMP/OSAT क्षमता का विस्तार, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास शामिल हैं। इस रणनीति का उद्देश्य भारत को केवल चिप डिजाइन या असेंबली के केंद्र तक सीमित रखने के बजाय सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य श्रृंखला में मजबूत भागीदार बनाना है।

चिप डिजाइन के क्षेत्र में भी भारत ने पिछले वर्षों में अपनी क्षमता बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के Chips to Startup कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी EDA टूल्स को सैकड़ों शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाया गया है। हजारों विद्यार्थियों और डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, कई संस्थानों ने चिप डिजाइन और ‘tape-out’ की प्रक्रिया में भी प्रगति की है। इससे भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन के लिए एक मजबूत प्रतिभा आधार तैयार करने की कोशिशों का पता चलता है।

SEMICON India 2026 में भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को वैश्विक उद्योग के सामने प्रदर्शित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, आयोजन में 600 से अधिक कंपनियों और करीब 52 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी है। सम्मेलन में छह देशों के पवेलियन, 12 राज्य बूथ, स्टार्टअप पवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन भी शामिल हैं। आयोजन में सेमीकंडक्टर सामग्री और उपकरण से लेकर चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम तक पूरी वैल्यू चेन को प्रदर्शित किया जा रहा है।

भारत की सेमीकंडक्टर नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू घरेलू उत्पादन क्षमता तैयार करना है। SEMICON India 2026 से पहले उद्योग संगठन SEMI ने बताया था कि Semicon India Programme के तहत स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से तीन ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है। यह बदलाव भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को केवल निवेश आकर्षित करने से आगे ले जाकर वास्तविक उत्पादन क्षमता से जोड़ने की दिशा में प्रगति दिखाई देती है।

प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को भारत की व्यापक विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षमता से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि देश में बुनियादी ढांचे के विस्तार से सामान और उपकरणों की आवाजाही आसान हो रही है, जिसका असर विनिर्माण क्षेत्र पर भी पड़ता है। उनके मुताबिक, हाल में करीब 3,000 किलोमीटर के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के परिचालन में आने से देश में लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलेगी और विनिर्माण को नई गति मिल सकती है।

सेमीकंडक्टर उद्योग में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। चिप निर्माण के लिए अत्याधुनिक मशीनों, विशेष सामग्रियों, डिजाइन तकनीक और विशेषज्ञ मानव संसाधन की जरूरत होती है। ऐसे में भारत का लक्ष्य घरेलू क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी मजबूत करना भी है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों से भारत में निवेश और सहयोग को और गहरा करने का आह्वान किया है। उन्होंने AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकों के लिए कौशल विकास में उद्योग की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

SEMICON India 2026 को भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा के अगले चरण के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। इस बार फोकस केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, उपकरण, सामग्री, फैब, पैकेजिंग, रिसर्च, स्टार्टअप और कुशल मानव संसाधन को जोड़कर एक पूर्ण इकोसिस्टम तैयार करने पर है। सरकार और उद्योग की योजनाओं के अनुसार, आने वाले समय में भारत की कोशिश वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की है।

कुल मिलाकर, SEMICON India 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता को अगले स्तर तक ले जाने पर केंद्रित रहा। सरकार का जोर घरेलू उत्पादन, चिप डिजाइन, एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान और कौशल विकास के साथ-साथ वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर है। वहीं, Semicon 2.0 के तहत 200 चिप डिजाइन कंपनियों और एक लाख तकनीशियनों का लक्ष्य यह संकेत देता है कि भारत अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल बाजार के रूप में नहीं, बल्कि डिजाइन, निर्माण और तकनीकी प्रतिभा के व्यापक केंद्र के रूप में अपनी क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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