भारत-नेपाल संबंधों को लेकर आया बड़ा अपडेट, विदेश मंत्री खनाल ने कही महत्वपूर्ण बात

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भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर नेपाल की ओर से सकारात्मक बयान सामने आया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत के साथ मौजूदा रिश्तों को बेहद अच्छा बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंधों में सहयोग की कई नई संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विशेष रूप से व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। खनाल ने यह बात न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत-नेपाल संबंधों से जुड़े सवालों के जवाब में कही।

नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध फिलहाल अच्छे दौर में हैं। उन्होंने इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपनी हालिया मुलाकात का भी जिक्र किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में दोनों विदेश मंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक हुई थी। इस बातचीत में भारत और नेपाल के बीच मौजूदा सहयोग, विकास परियोजनाओं और भविष्य में संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई।

बैठक के दौरान नेपाल में हाल में आई बाढ़ और उससे पैदा हुई स्थिति का मुद्दा भी सामने आया। नेपाली विदेश मंत्री ने बाढ़ के बाद भारत की ओर से मिली सहायता और समर्थन के लिए भारत सरकार तथा भारतीय जनता का आभार जताया। प्राकृतिक आपदाओं के समय दोनों देशों के बीच सहयोग पहले भी देखने को मिलता रहा है और हालिया घटनाक्रम ने मानवीय सहायता के क्षेत्र में आपसी समन्वय को भी रेखांकित किया है।

शिशिर खनाल ने भारत के साथ संबंधों में आर्थिक और व्यावहारिक सहयोग को विशेष महत्व दिया। उनका कहना था कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क भी इनका महत्वपूर्ण आधार हैं। नेपाल और भारत के बीच लंबे समय से चली आ रही खुली सीमा के कारण दोनों देशों के नागरिकों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संपर्क लगातार बना हुआ है।

व्यापार के लिहाज से भी भारत नेपाल के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार है। नेपाल के विदेश मंत्री ने बताया कि देश के कुल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई है। ऐसे में भारत के साथ आर्थिक संबंध नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। सीमा-पार व्यापार को आसान बनाना, परिवहन सुविधाओं में सुधार करना और कनेक्टिविटी को मजबूत करना दोनों देशों के लिए भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी नेपाल और भारत के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। नेपाल में जलविद्युत उत्पादन की पर्याप्त क्षमता मौजूद है और काठमांडू लंबे समय से इस क्षेत्र को अपनी अर्थव्यवस्था के विकास के प्रमुख साधनों में से एक मानता रहा है। खनाल ने नेपाल की आर्थिक रूप से उपयोगी जलविद्युत क्षमता को करीब 43 गीगावाट बताया। उनका कहना है कि जलविद्युत उत्पादन को बढ़ाकर नेपाल भारत को ज्यादा बिजली निर्यात कर सकता है और इससे देश के लिए विदेशी मुद्रा आय के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

भारत और नेपाल के बीच बिजली व्यापार पहले से ही द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। नेपाल के लिए अतिरिक्त बिजली को भारतीय बाजार में बेचना आर्थिक लाभ का माध्यम है, जबकि भारत के लिए नेपाल से मिलने वाली जलविद्युत क्षेत्रीय स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का हिस्सा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में परियोजनाओं और बिजली व्यापार का विस्तार दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण आयाम बन सकता है।

कनेक्टिविटी भी भारत-नेपाल संबंधों का एक प्रमुख विषय है। दोनों देशों की भौगोलिक निकटता को देखते हुए सड़क, रेल, ऊर्जा लाइन और सीमा-पार बुनियादी ढांचे के विकास को आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। नेपाल भारत के उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से जुड़ा हुआ है। बेहतर कनेक्टिविटी से नेपाल को भारतीय बाजार तक पहुंच बनाने और क्षेत्रीय व्यापार में अपनी भूमिका बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत और चीन दोनों के साथ संबंधों को लेकर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उनके अनुसार पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और आर्थिक विकास जैसे ठोस मुद्दों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। नेपाल की भौगोलिक स्थिति उसे भारत और चीन दोनों के साथ संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पैदा करती है।

हालांकि भारत और नेपाल के संबंध व्यापक और ऐतिहासिक हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच कुछ संवेदनशील मुद्दे भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। इनमें सीमा से जुड़े विवाद और अन्य द्विपक्षीय विषय शामिल हैं। ऐसे मुद्दों के बावजूद दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग जारी है। हालिया बातचीत में भी विकास और साझा हित वाले क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिखाई दिया।

जयशंकर और शिशिर खनाल के बीच सितंबर में हुई मुलाकात से पहले जून 2026 में भी दोनों नेताओं की दिल्ली में बातचीत हुई थी। उस दौरान द्विपक्षीय संबंधों, विकास साझेदारी, कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई थी। इसके बाद न्यूयॉर्क में हुई बैठक में दोनों पक्षों ने पहले से चल रहे सहयोग और भविष्य की संभावनाओं पर बातचीत की।

भारत और नेपाल के बीच संबंधों में ऊर्जा, व्यापार और बुनियादी ढांचे के साथ-साथ डिजिटल सहयोग का क्षेत्र भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है। सीमा-पार डिजिटल भुगतान और अन्य तकनीकी सुविधाओं से दोनों देशों के नागरिकों और कारोबारियों के बीच लेन-देन को आसान बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। विकास परियोजनाओं और डिजिटल कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और व्यापक बनाने की संभावना है।

नेपाल के विदेश मंत्री के हालिया बयान को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। उनकी टिप्पणियों में भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक रुख के साथ-साथ आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्राथमिकता स्पष्ट दिखाई देती है। व्यापार, जलविद्युत, कनेक्टिविटी और विकास साझेदारी ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें दोनों देशों के हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

कुल मिलाकर, न्यूयॉर्क में एस. जयशंकर के साथ हुई बातचीत और उसके बाद भारत-नेपाल संबंधों को लेकर शिशिर खनाल की सकारात्मक टिप्पणियां दोनों देशों के बीच जारी संवाद को दर्शाती हैं। नेपाल भारत के साथ अपने पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ आर्थिक एवं ऊर्जा सहयोग को भी आगे बढ़ाना चाहता है। आने वाले समय में जलविद्युत, बिजली व्यापार, व्यापारिक संपर्क और सीमा-पार कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे भारत-नेपाल संबंधों के महत्वपूर्ण केंद्र में बने रह सकते हैं।

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