दिल्ली में सरकारी जमीनों की वापसी पर विवाद तेज, IAF स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को लेकर कांग्रेस का हमला

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राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित भारतीय वायुसेना (IAF) के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की जमीन को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने मोदी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शर्मनाक और भारतीय वायुसेना के पूरे परिवार के प्रति अपमानजनक करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह परिसर दशकों से वायुसेना के अधिकारियों, जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए खेलकूद, मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले से संबंधित मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के इस परिसर का लंबा इतिहास रहा है और इसने कई दशकों तक महत्वपूर्ण सार्वजनिक एवं संस्थागत उद्देश्यों की पूर्ति की है। उनके मुताबिक, इस तरह की कार्रवाई वायुसेना के पूरे परिवार के प्रति अनादर को दर्शाती है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपनी सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर इस जमीन का मुद्दा उठाया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 26 अक्टूबर को हुई इस मुलाकात में उन्होंने रेसकोर्स एयर फोर्स स्टेशन की जमीन का नियंत्रण भारतीय वायुसेना के पास बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने इस जमीन के सामरिक और परिचालन महत्व का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों से मामले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, इस परिसर का महत्व केवल खेल गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वायुसेना मुख्यालय को प्रशासनिक सहायता देने के साथ-साथ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विभिन्न जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है।

प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के नजदीक रेसकोर्स एयर फोर्स स्टेशन के भीतर स्थित इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को 28 अक्टूबर से अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। यहां गोल्फ कोर्स, स्विमिंग पूल, फिटनेस सेंटर, बास्केटबॉल कोर्ट, रेस्तरां और मनोरंजन से जुड़ी कई अन्य सुविधाएं मौजूद थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने परिसर के प्रबंधन को जमीन खाली करने से संबंधित नोटिस जारी किया था। इसके बाद परिसर को बंद करने का फैसला लिया गया। बताया जा रहा है कि इस सुविधा से लगभग 5,000 सदस्य जुड़े हुए थे। इसके अलावा यहां काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है।

स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बंद होने का असर पूर्व वायुसेना प्रमुख एपी सिंह के विदाई कार्यक्रम पर भी पड़ा। 28 अक्टूबर को उनके सम्मान में आयोजित होने वाला पारंपरिक गोल्फिंग-आउट कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। यह कार्यक्रम वायुसेना प्रमुख की सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित होने वाली एक पारंपरिक अनौपचारिक गतिविधि है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और वायुसेना से जुड़े अन्य लोग शामिल होते हैं। गोल्फ कोर्स के संरक्षक के रूप में निवर्तमान वायुसेना प्रमुख के सम्मान में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता रहा है। ऐसे में परिसर बंद होने के कारण इस परंपरा का आयोजन नहीं हो सका।

दरअसल, आईएएफ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से जुड़ा यह मामला दिल्ली के लुटियंस इलाके में सरकारी जमीनों को वापस लेने की केंद्र सरकार की व्यापक कार्रवाई के बीच सामने आया है। पिछले कुछ महीनों में सरकार ने प्रधानमंत्री आवास के आसपास स्थित कई प्रमुख जमीनों और संस्थानों के उपयोग की समीक्षा की है। इससे पहले दिल्ली रेस क्लब की लगभग 53 एकड़ जमीन को अगस्त में वापस लिया गया था। इसके अलावा इंडिया पोलो एसोसिएशन से जुड़े जयपुर पोलो ग्राउंड की जमीन को लेकर भी कार्रवाई की गई है। वहीं, दिल्ली जिमखाना क्लब की लगभग 27 एकड़ जमीन को लेकर बेदखली की प्रक्रिया शुरू किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। इस मामले में कानूनी विवाद भी चल रहा है।

सरकार की ओर से जमीनों को वापस लेने की कार्रवाई के पीछे सार्वजनिक उद्देश्य, प्रशासनिक जरूरतों और सरकारी संपत्तियों के बेहतर उपयोग जैसे कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, आईएएफ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की जमीन का भविष्य में किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाएगा, इसे लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि वायुसेना से जुड़ी सुविधाओं को इस तरह बंद करना उचित नहीं है और सरकार को सेना के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम ने रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए आवंटित जमीन, सैन्य जरूरतों और वायुसेना कर्मियों के कल्याण से जुड़ी सुविधाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ केंद्र सरकार सरकारी जमीनों को वापस लेकर उनके उपयोग की समीक्षा कर रही है, तो दूसरी तरफ वायुसेना से जुड़े लोगों के लिए ऐसे परिसरों के महत्व का सवाल उठ रहा है। पूर्व वायुसेना प्रमुख द्वारा जमीन का मुद्दा रक्षा मंत्री के सामने उठाए जाने और कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय के अगले फैसले पर है कि इस जमीन का भविष्य क्या होगा और वायुसेना की जरूरतों तथा सरकारी जमीन के प्रस्तावित उपयोग के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाएगा।

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