असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर मॉक संसद को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी मॉक संसद में प्रधानमंत्री बन सकते हैं, लेकिन असली संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहेंगे। सरमा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के कई प्रयास किए गए, लेकिन जब वे सफल नहीं हुए तो मॉक संसद के जरिए उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया। उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित मॉक संसद के संदर्भ में आई है।
दरअसल, विपक्षी दलों की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास के लॉन में मॉक संसद का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं ने संसद की कार्यवाही जैसी व्यवस्था बनाकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) को लेकर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची से पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इसी विरोध के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।
मॉक संसद के आयोजन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष वास्तविक संसद में अपनी बात रखने के बजाय इस तरह के प्रतीकात्मक आयोजनों के जरिए राजनीतिक सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहा है। हिमंत बिस्वा सरमा ने इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मॉक संसद में उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन देश की वास्तविक संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहेंगे। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस इस तरह के आयोजनों के जरिए संवैधानिक संस्थाओं और संसद की गरिमा को लेकर भ्रम पैदा कर रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी असली संसद में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, इसलिए उन्हें मॉक संसद में ही प्रधानमंत्री बन जाना चाहिए। शाह ने इस टिप्पणी के जरिए कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने राहुल गांधी को संसद के विशेष सत्र में चुनाव आयोग, एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने की चुनौती भी दी। शाह का कहना था कि विपक्ष को संसद के भीतर अपनी बात रखनी चाहिए और सरकार के सामने तथ्यों के आधार पर सवाल उठाने चाहिए।
अमित शाह ने राहुल गांधी की राजनीतिक सक्रियता और विदेश यात्राओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को हर कुछ महीनों में विदेश जाने के बजाय देश में रहकर जनता के मुद्दों को समझना चाहिए। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव में हार मिलने पर ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है, जबकि जीत मिलने पर इन्हीं व्यवस्थाओं पर सवाल नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता का समर्थन हासिल कर रही है और विपक्ष राजनीतिक कारणों से चुनावी संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है।
एसआईआर को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका है, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए पुनरीक्षण जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया का विरोध करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस संबंध में दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक आरोपों का हिस्सा हैं और उनकी पुष्टि संबंधित आधिकारिक आंकड़ों तथा चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकती है।
मॉक संसद को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और एसआईआर को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है, वहीं भाजपा इन मुद्दों पर कांग्रेस की रणनीति को राजनीतिक दिखावा बता रही है। इस विवाद ने एक बार फिर राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर सियासी बहस तेज कर दी है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है।



