नई दिल्ली, 17 सितंबर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले उपहार और स्मृतिचिन्ह अब आम लोगों के लिए उपलब्ध हो रहे हैं। संस्कृति मंत्रालय और नेशनल गैलरी ऑफ मॉर्डन आर्ट (NGMA) द्वारा आयोजित सातवीं ई-नीलामी आज से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2025 तक चलेगी। इस नीलामी की खासियत यह है कि इससे होने वाली पूरी आय को नमामि गंगे परियोजना में खर्च किया जाएगा, जो देश की सबसे महत्वाकांक्षी नदी संरक्षण योजनाओं में से एक है।
1,300 से अधिक आइटम उपलब्ध
इस बार की ई-नीलामी में कुल 1,300 से ज्यादा उपहार शामिल किए गए हैं। इनमें से कई वस्तुएं बेहद अनोखी और ऐतिहासिक महत्व की हैं। प्रधानमंत्री को देश-विदेश से मिलने वाले इन उपहारों को पहले चयनित कर पंजीकृत किया जाता है और फिर उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रखा जाता है।
खास उपहार जो आकर्षण का केंद्र
नीलामी की लिस्ट में पारंपरिक, धार्मिक और कलात्मक वस्तुओं का संगम देखने को मिलेगा। कुछ प्रमुख आइटम इस प्रकार हैं:
बारीक कशीदाकारी वाला पश्मीना शॉल, जो भारतीय शिल्पकला का उत्कृष्ट नमूना है।
लोकप्रिय तंजौर पेंटिंग, जिसमें भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित राम दरबार का दृश्य अंकित है।
धातु की नटराज मूर्ति और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ।
आदिवासी शिल्पकला की अनोखी कृतियाँ और हस्तशिल्प।
राम मंदिर का मॉडल और धार्मिक स्मृति-चिन्ह।
खेल जगत से जुड़े उपहार और स्मारक।
इनके अलावा अंगवस्त्रम, टोपियाँ, शॉल और कई छोटे-मूल्य की वस्तुएँ भी शामिल की गई हैं, ताकि आम लोग भी आसानी से भाग ले सकें।
नीलामी में भाग लेने की प्रक्रिया
जो लोग इन स्मृतिचिन्हों पर बोली लगाना चाहते हैं, वे आधिकारिक पोर्टल pmmementos.gov.in पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। वेबसाइट पर नीलामी में उपलब्ध सभी वस्तुओं की सूची, शुरुआती कीमत और विस्तृत विवरण दिया गया है। इच्छुक बोलीदाता अपनी पसंद के अनुसार ऑनलाइन बिड कर सकते हैं।
पारदर्शिता और प्रदर्शनी
नीलामी से पहले इन वस्तुओं का सार्वजनिक प्रदर्शन नेशनल गैलरी ऑफ मॉर्डन आर्ट (NGMA), नई दिल्ली में किया गया। यहां मीडिया और आम लोगों को उपहारों की झलक दिखाई गई। आयोजकों का कहना है कि सभी वस्तुओं की प्रमाणिकता और स्रोत जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे नीलामी की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
यह नीलामी केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारतीय कला और संस्कृति का संरक्षण भी होता है। साथ ही, इससे जुटाया गया धन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा योगदान देता है। इससे पहले हुए संस्करणों से भी करोड़ों रुपये की राशि नमामि गंगे को दी गई थी, और उम्मीद है कि इस बार भी जनता की भागीदारी बड़ी संख्या में होगी।




