उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जिला प्रशासन ने गुरुवार को अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। यह अभियान मुख्य रूप से तालाब और ग्राम समाज की जमीन पर किए गए अवैध निर्माणों को हटाने के लिए चलाया गया। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने एक मदरसा, बरातघर (मैरेज हॉल) और अन्य अनधिकृत ढांचों को ध्वस्त कर दिया। इस कदम से पहले संबंधित पक्षों को नोटिस दिया गया था और समय सीमा में स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाने का निर्णय लिया।
कार्रवाई के दौरान इलाके को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया। भारी पुलिस बल के साथ-साथ पैरामिलिट्री के जवान भी तैनात किए गए ताकि किसी भी तरह की अवांछित स्थिति को रोका जा सके। जिला प्रशासन ने इलाके में फ्लैग मार्च निकाला और ड्रोन की मदद से लगातार निगरानी रखी। स्थानीय मार्गों पर आवागमन को भी नियंत्रित किया गया। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के तहत की गई और इसका उद्देश्य केवल सरकारी व सामुदायिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है।
जिला अधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि जिले में लंबे समय से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। जिन निर्माणों पर कार्रवाई हुई है, वे तालाब और ग्राम सभा की जमीन पर बने हुए थे। इन पर पहले नोटिस दिए गए थे, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। ऐसे में प्रशासन को मजबूर होकर ध्वस्तीकरण करना पड़ा। डीएम ने यह भी कहा कि कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष है और इसमें किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने की मंशा नहीं है।
स्थानीय लोगों की ओर से हालांकि कुछ नाराज़गी और आपत्ति दर्ज की गई। कई निवासियों ने कहा कि जिन स्थलों को गिराया गया, वे लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए उपयोग में आ रहे थे। अचानक की गई इस कार्रवाई से लोगों को कठिनाई झेलनी पड़ी। वहीं प्रशासन का कहना है कि इस तरह के निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध रूप से खड़े किए गए थे और नियमों के अनुसार इन्हें हटाना अनिवार्य था। सोशल मीडिया पर कार्रवाई से जुड़े वीडियो और तस्वीरें तेजी से फैलने लगीं, जिसके चलते माहौल संवेदनशील बना हुआ है और प्रशासन ने अफवाहों पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।
पिछले कुछ महीनों में भी संभल जिले में प्रशासन ने इस तरह की कई कार्रवाइयाँ की हैं। सितंबर में भी बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाए गए थे, जिनमें कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों की संपत्तियाँ भी शामिल थीं। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अतिक्रमण चिन्हित किए जाएंगे और चरणबद्ध तरीके से उन्हें हटाया जाएगा।
प्रशासन की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि जिन लोगों के निर्माण गिराए गए हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। आवश्यक होने पर जुर्माना लगाया जाएगा और सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल पूरे क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी बनी हुई है और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
संभल में हुई यह कार्रवाई प्रशासन की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत अवैध कब्जों और नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए ढाँचों को हटाया जा रहा है। हालांकि इस तरह की कार्रवाइयों से स्थानीय समुदायों में असंतोष और विवाद की स्थिति भी पैदा हो जाती है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि कानून और व्यवस्था को कायम रखते हुए सरकारी भूमि को मुक्त कराना ही प्राथमिक उद्देश्य है। आने वाले दिनों में प्रशासन, स्थानीय प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के बीच संवाद और कानूनी प्रक्रिया का संतुलन ही क्षेत्र के माहौल को स्थिर बना सकेगा।




