जगदलपुर (छत्तीसगढ़)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को अपने दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के तहत जगदलपुर पहुंचे। यहां उन्होंने बस्तर दशहरे के अवसर पर आयोजित स्वदेशी मेले का निरीक्षण किया और स्थानीय कारीगरों, कलाकारों एवं उद्यमियों से बातचीत की। शाह ने पारंपरिक हस्तशिल्प, लकड़ी और बांस से बने उत्पाद, ढोकरा कला, जंगली शहद, महुआ और तेंदूपत्ता से बने उत्पादों की बारीकी से समीक्षा की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को सशक्त बनाना है, जिसमें बस्तर के ये स्वदेशी उत्पाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
स्वदेशी मेले का यह दौरा सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा। बस्तर दशहरा, जो करीब 75 दिनों तक चलता है, केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि आदिवासी परंपरा और सामाजिक एकता का अविष्कार माना जाता है। इस दौरान पारंपरिक रथ यात्रा, देवी-देवताओं की पूजा और अन्य अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें इस वर्ष गृह मंत्री अमित शाह भी भाग लेंगे। उनका दौरा इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और किसानों के लिए आर्थिक अवसरों को उजागर करने के उद्देश्य से भी जुड़ा है।
राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अमित शाह का यह दौरा अहम माना जा रहा है। बस्तर क्षेत्र नक्सल प्रभावित रहा है और पिछले वर्षों में सुरक्षा बलों ने कई सफल अभियान चलाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में नक्सलियों को चेतावनी दी थी कि उन्हें हर हाल में हथियार डालने होंगे, अन्यथा सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इसी क्रम में उनके इस दौरे में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और विकास परियोजनाओं की समीक्षा भी शामिल होने की संभावना है।
स्थानीय लोगों में अमित शाह के दौरे को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कारीगरों और स्व-सहायता समूहों का मानना है कि यदि सरकार स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए तो उनकी आजीविका मजबूत होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही यह दौरा आगामी विधानसभा चुनावों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




