गाजा में युद्ध की शुरुआत के बाद अमेरिका ने इजरायल को कम से कम 21.7 अरब डॉलर की सैन्य सहायता दी है। यह जानकारी ब्राउन विश्वविद्यालय के वॉटसन स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स के ‘कॉस्ट्स ऑफ वॉर’ प्रोजेक्ट की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले वर्ष में इजरायल को 17.9 अरब डॉलर और दूसरे वर्ष में 3.8 अरब डॉलर की सहायता दी गई। यह सहायता सीधे हथियारों, मिसाइलों, रक्षा प्रणालियों और अन्य सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में खर्च की गई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिका की यह मदद इजरायल को गाजा, लेबनान और ईरान के खिलाफ युद्ध संचालन जारी रखने में महत्वपूर्ण रही है। इसके बिना इजरायल के लिए इन क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाइयों को जारी रखना मुश्किल होता। अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति भी बढ़ाई है, जिसमें यमन और ईरान में संचालन शामिल हैं, और इन अभियानों पर अनुमानित 9.65 अरब से 12 अरब डॉलर खर्च हुए हैं।
गाजा युद्ध का मानवीय असर अत्यंत गंभीर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, गाजा में लगभग 1,93,000 इमारतें, 213 अस्पताल और 1,000 से अधिक स्कूल नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, और स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी के चलते मानवीय संकट गहरा गया है।
अमेरिका की इस सैन्य सहायता पर वैश्विक स्तर पर आलोचना भी हो रही है। मानवाधिकार संगठन और कई अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्य इसे युद्धविराम प्रक्रिया में बाधा डालने वाला और मानवीय संकट बढ़ाने वाला मान रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की यह मदद इजरायल को युद्ध में रणनीतिक बढ़त देने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता और मध्य पूर्व में शांति प्रयासों पर भी असर डाल सकती है।
इस युद्ध और सहायता पैकेज ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गहरी हलचल मचा दी है। अमेरिका की इजरायल को दी गई विशाल सैन्य मदद ने न केवल इस संघर्ष की दिशा तय की है बल्कि दुनिया भर में मानवीय और राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है।




