अयोध्या इन दिनों उल्लास और आध्यात्मिक उमंग में डूबी हुई है। राम मंदिर में होने वाले ध्वजारोहण से पहले शहर का हर कोना भक्तिभाव से सराबोर दिखाई देता है। मुख्य मार्गों, मंदिर परिसर और सरयू तट तक भव्य सजावट की गई है। हर जगह रोशनी, फूलों की झालरों और ध्वजों से सजा दृश्य किसी बड़े उत्सव की भांति दिखाई देता है। सुबह से ही सरयू स्नान कर श्रद्धालु रामलला के दर्शन को उमड़ रहे हैं और पूरे शहर में रामधुनों की गूंज सुनाई दे रही है। कई स्थानों पर भक्त ढोल-नगाड़ों की थाप और भजनों के साथ झूमते नजर आ रहे हैं, जिससे वातावरण और अधिक जीवंत हो उठा है।
आगामी समारोह को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा की कड़ी व्यवस्थाएँ की हैं। रामपथ और जन्मभूमि परिसर के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, जबकि निगरानी के लिए ड्रोन और विशेष दस्ते तैनात हैं। VIP आगमन को ध्यान में रखते हुए यातायात को नियंत्रित किया गया है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियाँ चौकन्नी हैं।
इस आयोजन का एक अहम पहलू यह भी है कि बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी को भी आमंत्रण भेजा गया है। उन्हें पहले भी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए निमंत्रण मिला था और इस बार दोबारा बुलाए जाने को कई लोग सद्भाव और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बता रहे हैं। उनका आमंत्रण इस आयोजन को एक सकारात्मक और समावेशी संदेश देने वाला माना जा रहा है।
ध्वजारोहण के लिए तैयार किया गया विशेष भगवा ध्वज भी काफी चर्चा में है। यह मजबूत और टिकाऊ सामग्री से तैयार किया गया है, ताकि मंदिर के शिखर पर तेज हवाओं में भी सुरक्षित रूप से फहरता रहे। इसे विशेष तकनीकी व्यवस्था के साथ स्थापित किया जाना है, जिसके लिए विशेषज्ञ टीम लगातार परीक्षण और व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कर रही है।
भक्तिभाव, उत्साह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्तों के बीच अयोध्या इस समय एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने को तैयार है — जहां श्रद्धा, सद्भाव और उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।




