उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार अब फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को गांव-गांव तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत हर जिले में बड़ी संख्या में नई फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। वर्तमान में प्रदेश में करीब 65 हजार फूड प्रोसेसिंग इकाइयां संचालित हैं, जिनसे लगभग ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलता है। सरकार का लक्ष्य इस नेटवर्क को और मजबूत बनाते हुए अगले चरण में लगभग 75 हजार नई इकाइयों का विस्तार करना है, जिससे प्रत्येक जिले में करीब एक हजार यूनिट का विकास संभव हो सके। यह कदम किसानों की उपज को बेहतर कीमत दिलाने, कृषि अपशिष्ट को कम करने और ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य सरकार इस योजना के लिए निवेश आकर्षित करने और उद्योगों को आसान प्रक्रियाओं के माध्यम से स्थापित करने हेतु सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम को और प्रभावी बनाने की तैयारी में है। इसके साथ ही कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने तथा छोटे उद्यमियों के लिए वित्तीय सहायता आसान करने की व्यवस्था भी लागू की जा रही है। योजना को “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” मिशन से जोड़कर स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक गांव में माइक्रो और स्मॉल फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित हों और किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण उद्यमियों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि प्रसंस्कृत उत्पादों के कारण बाजार में यूपी के कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और खेत से बाजार तक की पूरी सप्लाई चेन अधिक कुशल बनेगी। सरकार के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के लागू होने के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे और राज्य खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में देश के अग्रणी प्रदेशों में शामिल होगा। तेजी से विकसित होते खाद्य उद्योग के बीच यह कदम यूपी को एक बड़े फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में स्थापित कर सकता है।




