डॉ. भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि: संविधान रक्षक की विचारधारा आज भी प्रासंगिक

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डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि 6 दिसंबर 2025 को पूरे देश में महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर संसद परिसर में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई, जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर सोशल मीडिया पर लिखा कि “महापरिनिर्वाण दिवस पर हम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को नमन करते हैं। उनका दूरदर्शी नेतृत्व, न्याय और समानता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान के प्रति समर्पण हमारी राष्ट्रीय यात्रा को दिशा देता रहा है।” मोदी ने यह भी कहा कि आंबेडकर का संघर्ष लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण था और उनकी मेहनत एवं संवैधानिक दृष्टि ने भारत को एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया।

वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि “बाबासाहेब आंबेडकर की समानता, न्याय और मानवीय गरिमा की विरासत हमारी संविधान रक्षा की प्रतिबद्धता और समावेशी भारत बनाने के संघर्ष की प्रेरणा है।” उन्होंने चेतावनी दी कि हर भारतीय का संविधान खतरे में है और इसे सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी आंबेडकर की विचारधारा और उनके संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनका आदर्श आज भी समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय के लिए पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिक और सामाजिक संगठन आंबेडकर के आदर्शों और उनके विचारों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। डॉ. आंबेडकर ने न केवल संविधान की रचना की, बल्कि दलितों और वंचितों के अधिकारों, सामाजिक समानता और न्याय के लिए भी अथक संघर्ष किया। उनका दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है और शिक्षा, सामाजिक न्याय और समान अवसर की उनकी विचारधारा नए उत्साह और प्रतिबद्धता को जन्म देती है। 6 दिसंबर 2025 को उनकी 70वीं पुण्यतिथि पर देशभर में जिस श्रद्धा और सम्मान के साथ उन्हें याद किया जा रहा है, वह दर्शाता है कि बाबासाहेब का सपना और उनकी विरासत आज भी जीवित है।

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