लोकसभा में वंदे मातरम् की गूंज, पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

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लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित विशेष चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व और इसके साथ हुए विवादों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की वह चेतना है जिसने देश को ब्रिटिश दासता के खिलाफ एकजुट किया। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि जब इस गीत के 50 वर्ष पूरे हुए थे, तब पूरा देश साम्राज्यवादी शासन की बेड़ियों में जकड़ा था, और 100 वर्ष पूरे होने पर देश आपातकाल की कठोर परिस्थितियों में था। ऐसे में 150वीं वर्षगांठ पर वंदे मातरम् का सम्मान करना देश की ऐतिहासिक चेतना को फिर से जीवंत करने जैसा है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने उस दौर का भी उल्लेख किया जब वंदे मातरम् पर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना के विरोध के दबाव में तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने गीत के कुछ अंशों को हटाने और इसके उपयोग को सीमित करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री ने इसे वंदे मातरम् का “पहला विभाजन” बताते हुए कहा कि इस फैसले से राष्ट्रगीत की मूल भावना को क्षति पहुंची और यह राष्ट्रहित के विरुद्ध एक ऐतिहासिक भूल थी।

पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् ऐसे समय में भारतीयों की प्रेरणा बना जब ब्रिटिश शासन “God Save the Queen” को हर घर और हर समारोह में अनिवार्य बनाना चाहता था। इस माहौल में वंदे मातरम् ने भारतीयों को यह एहसास दिलाया कि दासता के समय भी आवाज उठाई जा सकती है और राष्ट्रीय चेतना को बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह गीत बंगाल विभाजन के समय भी एक बड़ी शक्ति बनकर उभरा और लोगों को एक सूत्र में बांधने में इसकी बड़ी भूमिका रही।

प्रधानमंत्री ने सदन से अपील की कि वंदे मातरम् को केवल एक गीत की तरह नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संघर्ष की उस विरासत के रूप में देखा जाए जिसे न सिर्फ गाया जाता है बल्कि महसूस भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत की सांस्कृतिक अस्मिता, देशभक्ति और एकता का प्रतीक है, और इसकी 150वीं वर्षगांठ देश के लिए गौरव का क्षण है। चर्चा के दौरान सरकार ने भी स्पष्ट किया कि संसद में यह विमर्श इसलिए आयोजित किया जा रहा है ताकि राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक संदर्भ और उसकी आज की प्रासंगिकता पर व्यापक राष्ट्रीय संवाद संभव हो सके।

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