यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति का 20वां सत्र इस समय नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित हो रहा है, जहाँ 8 से 13 दिसंबर 2025 तक दुनिया भर से आए प्रतिनिधि विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं पर चर्चा कर रहे हैं। इसी बैठक के एजेंडे में भारत द्वारा भेजा गया दीपावली को अमूर्त विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भी दर्ज है, जिस पर 9 और 10 दिसंबर के दौरान विचार होने की संभावना जताई जा रही है। भारत ने मार्च 2024 में यह नामांकन आधिकारिक रूप से यूनेस्को को भेजा था, जिसके बाद विशेषज्ञ समितियों में इसकी जाँच-प्रक्रिया पूरी हुई और अब अंतिम निर्णय इस सत्र में हो सकता है।
बैठक के मद्देनज़र दिल्ली में भी विशेष तैयारियाँ की गई हैं। लाल किले के साथ-साथ कई अन्य ऐतिहासिक स्मारकों को विशेष रोशनी से सजाने की योजना बनाई गई है। चांदनी चौक और पुरानी दिल्ली के प्रमुख हिस्सों में दीपों, रंगोलियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दिवाली की सामाजिक और सांस्कृतिक भावना को प्रदर्शित किया जाएगा। देश की ओर से आए अधिकारी और प्रतिनिधि यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि दीपावली सिर्फ धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि भारत की जीवंत सामाजिक परंपरा, कला, लोकअभिव्यक्तियों और समुदायों के बीच सद्भाव की एक अनोखी सांस्कृतिक विरासत है।
सरकारी सूत्रों का मानना है कि यदि यूनेस्को दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करता है, तो इससे न केवल इसकी वैश्विक पहचान को और मजबूती मिलेगी बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई प्रतिष्ठा भी प्राप्त होगी। यूनेस्को की इस सूची में शामिल होना किसी परंपरा के तौर-तरीकों को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं देता, बल्कि इसका उद्देश्य समुदायों को संरक्षण, दस्तावेज़ीकरण और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए प्रोत्साहित करना होता है। यही वजह है कि इस निर्णय के पहले ही सरकार ने दीपावली की सांस्कृतिक महत्ता को व्यावहारिक और सौम्य रूप में दुनिया के सामने पेश करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया है।




