नई दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्र सरकार के VB-G RAM G कानून को लेकर तीखा हमला बोला है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि यह कानून वस्तुतः मनरेगा को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका सीधा और गंभीर असर देश के गांवों, गरीबों और ग्रामीण मजदूरों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए आजीविका और सम्मान का कानूनी अधिकार था, जिसे कमजोर किया जा रहा है।
सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा ने पिछले दो दशकों में गांवों में रोजगार की गारंटी देकर गरीबी, भूख और पलायन को कम करने में अहम भूमिका निभाई। यह योजना ग्राम पंचायतों के माध्यम से लागू होती थी, जिससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहती थी। लेकिन नए VB-G RAM G कानून के तहत इस अधिकार-आधारित व्यवस्था को बदलकर केंद्र-नियंत्रित और लक्ष्य-आधारित मॉडल लाया जा रहा है, जिससे गरीब मजदूरों की सुरक्षा कमजोर होगी।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने बिना व्यापक चर्चा और विपक्ष से संवाद किए इस कानून को लागू किया है। उनका कहना है कि रोजगार की कानूनी गारंटी को समाप्त या कमजोर करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा, खासकर उन इलाकों में जहां मनरेगा संकट के समय सहारा योजना के रूप में काम करती रही है। उन्होंने इसे गरीब-विरोधी कदम बताते हुए कहा कि इससे गांवों में बेरोजगारी और असमानता बढ़ने का खतरा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस कानून का विरोध करते हुए कहा कि सरकार विकास के नाम पर गरीबों के अधिकार छीन रही है। विपक्ष का आरोप है कि नया कानून राज्यों और पंचायतों की भूमिका को सीमित करता है और ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाली सुरक्षा को कमजोर बनाता है। पार्टी ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाएगी।
वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि VB-G RAM G कानून का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार और आजीविका को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाना है। सरकार का दावा है कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और व्यवस्था अधिक कुशल होगी। हालांकि, कांग्रेस और विपक्ष इसे मनरेगा की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए लगातार विरोध कर रहे हैं। कुल मिलाकर यह मुद्दा अब ग्रामीण भारत के भविष्य और रोजगार की गारंटी को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है।




