संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान की स्थिति को लेकर हुई बैठक में भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला और अफगानिस्तान में किए जा रहे हवाई हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी देश द्वारा सीमा पार सैन्य कार्रवाई करना अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन है। भारत ने कहा कि हाल के हमलों में निर्दोष नागरिकों की मौत की खबरें सामने आई हैं, जो बेहद चिंताजनक है और इससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर भी खतरा पैदा हो सकता है।
भारत ने यह भी कहा कि एक ओर कुछ देश अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता की बात करते हैं, लेकिन दूसरी ओर रमजान जैसे पवित्र महीने में हवाई हमले किए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों की जान जा रही है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई दोहरे मानदंड को दर्शाती है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि अफगानिस्तान में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हिंसा रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
बैठक के दौरान भारत ने अफगानिस्तान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों और विकास सहयोग का भी उल्लेख किया। भारत ने बताया कि वह अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में 500 से अधिक विकास परियोजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग कर रहा है। इसके अलावा भारत समय-समय पर अफगानिस्तान को मानवीय सहायता, दवाइयां और खाद्यान्न भी उपलब्ध कराता रहा है।
भारत ने आतंकवाद के मुद्दे को भी उठाते हुए कहा कि आईएसआईएल, अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और द रेजिस्टेंस फ्रंट जैसे आतंकी संगठन क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन संगठनों के खिलाफ सख्त और समन्वित कार्रवाई करने की मांग की। भारत ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान जैसे भू-आवेष्ठित देश के लिए व्यापार और पारगमन के रास्तों को बाधित करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे वहां की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
भारत ने अंत में दोहराया कि वह अफगानिस्तान की जनता के साथ खड़ा है और वहां स्थिरता, शांति और विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आवश्यक मानता है। भारत का कहना है कि अफगानिस्तान में शांति बनाए रखने के लिए सभी देशों को जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने चाहिए और किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए, जिससे निर्दोष नागरिकों की जान को खतरा हो।




