दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में नया कानूनी मोर्चा, ED की याचिका पर हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

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दिल्ली की कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले में कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। ईडी ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर की गई प्रतिकूल टिप्पणियां अनुचित हैं और इन्हें रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि इस मामले की विस्तृत सुनवाई 19 मार्च को की जाएगी। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले और उसमें की गई टिप्पणियों पर आगे क्या रुख अपनाया जाए।

दरअसल, 2021–22 की दिल्ली सरकार की आबकारी नीति को लेकर सीबीआई ने 2022 में एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी का आरोप था कि नीति बनाते समय कुछ प्रावधान ऐसे बनाए गए थे जिनसे कुछ निजी शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचा। इसके बाद ईडी ने भी इसी मामले में धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) का केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।

हाल ही में राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया। साथ ही कोर्ट ने जांच एजेंसियों की जांच प्रक्रिया को लेकर भी कुछ टिप्पणियां की थीं।

इसी फैसले को चुनौती देते हुए पहले सीबीआई और अब ईडी दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची है। एजेंसियों का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया और जांच एजेंसियों के खिलाफ की गई टिप्पणियां उचित नहीं हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।

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