आम आदमी पार्टी में महाभूकंप, राघव चड्ढा के साथ कई सांसद बदलेंगे पाला

SHARE:

आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का एलान कर दिया। राघव चड्ढा ने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसद उनके साथ हैं और वे भी जल्द भाजपा का दामन थामेंगे। इस घटनाक्रम ने न केवल AAP के भीतर गहरे असंतोष को उजागर किया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है।

दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष आम आदमी पार्टी को दिए, लेकिन अब पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP अब जनसेवा की बजाय आंतरिक कलह, व्यक्तिवाद और सत्ता की राजनीति में उलझ गई है। चड्ढा ने खुद को “सही व्यक्ति, गलत पार्टी” में होने की बात कहते हुए अपने फैसले को विचारधारा और जनहित से प्रेरित बताया।

रिपोर्टों के मुताबिक, राघव चड्ढा के साथ राज्यसभा के कई अन्य सांसद भी पार्टी छोड़ सकते हैं। इनमें संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल और कुछ अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं। पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह के भी इस गुट के संपर्क में होने की चर्चा है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो AAP की राज्यसभा में ताकत को बड़ा नुकसान हो सकता है।

यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ सप्ताह पहले ही पार्टी नेतृत्व ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया था। इसके बाद से उनके और पार्टी नेतृत्व, खासकर अरविंद केजरीवाल, के बीच मतभेदों की अटकलें लगातार लगाई जा रही थीं। पिछले कुछ महीनों से चड्ढा पार्टी की कई महत्वपूर्ण बैठकों और कार्यक्रमों से भी दूरी बनाए हुए थे।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद किसी अन्य दल में विलय का फैसला करते हैं, तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता। ऐसे में राघव चड्ढा और उनके समर्थक सांसद अपनी सदस्यता गंवाए बिना भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इससे राज्यसभा में भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी, जबकि आम आदमी पार्टी की संसदीय उपस्थिति कमजोर पड़ सकती है।

AAP के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा संसदीय संकट माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस राजनीतिक भूचाल का असर दिल्ली, पंजाब और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर किस प्रकार पड़ता है।

Leave a Comment