मुंबई में एक बार फिर ठाकरे बंधु—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—एक साथ नजर आएंगे, वो भी एक विरोध प्रदर्शन के मंच पर। हिंदी भाषा को लेकर केंद्र सरकार की कथित ‘थोपने की नीति’ के खिलाफ ये दोनों नेता एकजुट होकर मोर्चा खोलने जा रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब महाराष्ट्र में हिंदी बनाम मराठी को लेकर सियासी हलचल हुई हो, लेकिन इस बार मामला खास है क्योंकि वर्षों से अलग-अलग राह चलने वाले उद्धव और राज ठाकरे अब एक ही मंच पर साथ खड़े होंगे। सूत्रों के मुताबिक, यह संयुक्त प्रदर्शन अगले सप्ताह मुंबई के आज़ाद मैदान में आयोजित किया जाएगा।
ठाकरे बंधुओं का आरोप है कि केंद्र सरकार शिक्षा, नौकरियों और प्रशासन में हिंदी को प्राथमिकता देकर क्षेत्रीय भाषाओं को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही है। इस मसले को लेकर शिवसेना (उद्धव गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने मिलकर एक साझा रणनीति बनाई है।
राज ठाकरे ने बयान में कहा— “मराठी हमारी मातृभाषा है, और हम इसकी अस्मिता से कोई समझौता नहीं करेंगे। हिंदी हमारी भाषा हो सकती है, लेकिन इसे थोपना स्वीकार नहीं।”
वहीं, उद्धव ठाकरे ने भी समर्थन जताते हुए कहा— “हमारी संस्कृति, हमारी भाषा को बचाने की लड़ाई में अब राजनीतिक मतभेद पीछे हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम न केवल केंद्र की भाषा नीति के खिलाफ एक मजबूत संदेश है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार की संभावित नजदीकी का संकेत भी।हिंदी बनाम मराठी बहस फिर से गर्माई है, लेकिन इस बार यह राजनीतिक एकता के नए समीकरण भी गढ़ रही है। आने वाले दिनों में इसका असर राज्य की राजनीति पर गहराई से पड़ सकता है।




