रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून की बैठक के बाद भारत–चीन के बीच छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कैलाश–मानसरोवर यात्रा को पुनः आरंभ करने की सहमति बन गई है…” आपको बता दें की यह ऐतिहासिक निर्णय हुआ है किंगदाओ में हुए SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स (Twitter) पर साझा किया कि दोनों पक्षों ने ‘रचनात्मक और दूरदर्शी विचारों’ साझा किए और यात्रा शुरू करने की सहमति जताई।”यह यात्रा 2019–2020 में कोविड-19 और सीमा तनाव के कारण रोकी गई थी। तब से यह भारत–चीन संबंधों की सुस्ती का प्रतीक रही—लेकिन अभी इस फैसले को ‘दूसरे स्तर का प्रतीक’ माना जा रहा है।इस साल चयनित 750 तीर्थयात्रियों को दो मार्गों—लिपुलेख (उत्तरी भारत) और नाथुला (सिक्किम)**—के माध्यम से भेजा जाएगा। यह यात्रा जून से अगस्त तक चलने की संभावना है।नाथुला मार्ग को ‘सबसे सुविधा–सम्पन्न और सुरक्षित’ मार्ग माना जा रहा है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं और विश्राम केंद्र स्थापित किए गए हैं।इस पहल को सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत–चीन संबंधों में एक नरम ‘पीपुल–टू–पीपुल’ पुल के तौर पर भी देखा जा रहा है। हांलाकि सीमा पर मौजूद वास्तविक मुद्दे और सैनिक तैनाती अभी बरकरार हैं। हम आपको बताते चलते हैं कि भारत सरकार ने योग्य और योग्यतम आवेदकों को कंप्यूटर–जनित प्रणाली के द्वारा चयनित किया, और इस वर्ष कुल 750 यात्रियों का चयन हुआ है।




