शी जिनपिंग और पुतिन की अनुपस्थिति से बदलेगा BRICS का संतुलन

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ब्राजील के रियो डी जेनेरो में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन इस बार कई वजहों से चर्चा में है। पहली और सबसे बड़ी वजह — मंच से चीन और रूस के शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी। शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की अनुपस्थिति ने सम्मेलन की कूटनीतिक दिशा को बदलने का संकेत दे दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, चीन में घरेलू आर्थिक तनाव और वैश्विक दबाव के चलते शी जिनपिंग ने इस बार सम्मेलन से दूरी बना ली है। वहीं रूस के राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से सीमित विदेश यात्राओं पर हैं।

अब ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के पास BRICS के एजेंडे और भविष्य की दिशा तय करने का बड़ा अवसर है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भारत के लिए अपनी वैश्विक नेतृत्व क्षमता दिखाने और ग्लोबल साउथ की आवाज को और मजबूत करने का सुनहरा मौका है।

ब्राजील भी इस मंच के जरिए जलवायु परिवर्तन, सामाजिक विकास और वैश्विक समावेश जैसे मुद्दों को मजबूती से उठाना चाहता है।

BRICS जैसे समूहों में शक्ति संतुलन अक्सर उन नेताओं के इर्द-गिर्द घूमता है जो मंच पर सबसे मुखर होते हैं। इस बार भारत और ब्राजील, दोनों लोकतांत्रिक देश, इस खाली स्पेस को भरने को तैयार नजर आ रहे हैं।

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