अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार और मौजूदा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीयर ने कहा है कि भारत एक संप्रभु देश है और अपने फैसले स्वयं लेने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका यह निर्देश नहीं दे सकता कि भारत किस देश से तेल खरीदे। ग्रीयर ने न्यूयॉर्क के Economic Club में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत एक “व्यावहारिक राष्ट्र” है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेता है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन की यह समझ है कि नई दिल्ली धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठा रही है।
रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने पहले भी चिंता जताई थी। पश्चिमी देशों का कहना है कि रूस से कच्चा तेल खरीदना अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को आर्थिक सहारा देने जैसा है। इसके बावजूद भारत ने यह स्पष्ट रुख अपनाया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और किसी भी देश से सस्ती कीमत पर तेल खरीदने का अधिकार रखता है। भारत का तर्क है कि वह रूस से तेल खरीदकर न केवल अपने नागरिकों को राहत दे रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने में भी योगदान कर रहा है।
अमेरिकी अधिकारी जेमिसन ग्रीयर ने कहा कि अमेरिका भारत पर किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाना चाहता, बल्कि दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान तलाशना चाहता है। उन्होंने यह भी माना कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं, और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग इसके प्रमुख स्तंभों में से एक है।
वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने का भारत का निर्णय उसकी अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद रहा है। रूस द्वारा दी जा रही रियायती दरों पर भारत ने बड़ी मात्रा में तेल खरीदा है, जिससे देश की रिफाइनरियों को कच्चे तेल की लागत में बड़ी राहत मिली है। साथ ही, G7 देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने स्पष्ट किया है कि वह केवल संयुक्त राष्ट्र के मान्यता प्राप्त प्रतिबंधों को ही मानेगा।
ग्रीयर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश लगातार रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों को कड़ा करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह भारत जैसे साझेदार देशों के साथ खुला संवाद जारी रखेगा ताकि ऊर्जा बाजार स्थिर रहे और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो। ग्रीयर के इस बयान से यह भी स्पष्ट संकेत मिला है कि अमेरिका भारत के रणनीतिक स्वायत्तता का सम्मान करता है और उस पर किसी तरह का “तेल खरीद निर्देश” थोपने के पक्ष में नहीं है।




