नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2025: भारत ने 2024-25 के वित्तीय वर्ष में घरेलू स्रोतों से सैन्य उपकरणों और हथियारों की खरीद में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, इस अवधि में स्वदेशी सैन्य उपकरणों पर कुल खर्च 1.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। 2021-22 में यह राशि 74,000 करोड़ रुपये थी, जबकि अब यह आंकड़ा तेजी से बढ़कर वर्तमान स्तर पर पहुँच गया है।
रक्षा मंत्री ने इसे केवल आर्थिक आंकड़ों का बदलाव नहीं बल्कि भारत की मानसिकता में बदलाव और आत्मविश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की युद्ध रणनीतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियाँ, ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, क्वांटम कंप्यूटिंग और निर्देशित ऊर्जा हथियार जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सरकार इन तकनीकों के विकास और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में iDEX (Innovations for Defence Excellence) कार्यक्रम के तहत युवाओं को भारत का पहला रक्षा यूनिकॉर्न बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 1.27 लाख करोड़ रुपये से 18 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, रक्षा निर्यात 23,500 करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जो देश की वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश में स्थापित रक्षा औद्योगिक गलियारा (UPDIC) भी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना में अब तक 28,809 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और यह छह प्रमुख नोड्स—अलीगढ़, आगरा, चित्रकूट, झांसी, कानपुर और लखनऊ—में फैला हुआ है। यह गलियारा राज्य में रक्षा उत्पादन को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार सृजन में भी मदद करेगा।
इस प्रकार, भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती यह पहल न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर देश की स्थिति को भी और सुदृढ़ करेगी। सरकार की नीतियाँ और युवाओं की सक्रिय भागीदारी इस दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं।




