प्रधानमंत्री कार्यालय का नया नाम ‘सेवा तीर्थ’, देशभर के राजभवन बने ‘लोक भवन’

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केंद्र सरकार ने देश के प्रशासनिक ढांचे में प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर “सेवा तीर्थ” करने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि नया PMO परिसर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस Executive Enclave-I के भीतर विकसित किया गया है, जिसे अब आधिकारिक रूप से Seva Teerth-1 कहा जाएगा। इसके साथ जुड़े अन्य विभागों और कार्यालयों के लिए Seva Teerth-2 और Seva Teerth-3 जैसे अतिरिक्त भवन भी तैयार किए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह नामकरण केवल औपचारिक बदलाव नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय की कार्यशैली में “सेवा, सुशासन और नागरिक-प्रधान दृष्टिकोण” को परिभाषित करने की एक नई शुरुआत है।

इसी क्रम में केंद्र सरकार ने देशभर के राजभवनों (Raj Bhavan) का नाम बदलकर “लोक भवन (Lok Bhavan)” करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई राज्यों ने गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिए हैं और नए नाम का उपयोग आरंभ हो गया है। जानकारी के अनुसार, यह पहल औपनिवेशिक काल में प्रचलित प्रशासनिक शब्दावली से दूरी बनाकर शासन-व्यवस्था में अधिक लोकतांत्रिक और लोक-केंद्रित पहचान स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। केरल, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड जैसे राज्यों में यह बदलाव लागू भी हो चुका है, जबकि अन्य राज्यों में प्रक्रिया जारी है।

इन बदलावों के पीछे केंद्र सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक संस्थानों की छवि को अधिक संवेदनशील, खुली और जन-संपर्क आधारित बनाना बताया जा रहा है। हालांकि इस निर्णय पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। केंद्र समर्थक इसे “भारत की सेवा परंपरा” से जुड़े प्रतीकों को पुनर्जीवित करने वाला कदम बताते हैं, वहीं विपक्ष ने तर्क दिया है कि नाम बदलने की बजाय शासन और जनसेवा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर होना चाहिए। तामिलनाडु के मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं ने टिप्पणी की है कि वास्तविक परिवर्तन नीतियों और कार्यप्रणाली में होना चाहिए, नामों में नहीं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इन नाम परिवर्तनों का प्रभाव केवल प्रतीकात्मक नहीं होगा, बल्कि प्रशासनिक दस्तावेज़ों, सरकारी रिकॉर्ड, बोर्ड, संकेतक (signage) और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर अपडेट की भी आवश्यकता पड़ेगी। साथ ही यह भी देखने योग्य होगा कि क्या इन परिवर्तनों से सरकारी सेवाओं की सुगमता, पारदर्शिता और लोगों के साथ संवाद में ठोस सुधार दिखाई देगा या नहीं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में इन बदलावों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और सभी संबंधित विभागों को इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे जाएंगे।

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