रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दो दिन का भारत दौरा 4–5 दिसंबर को शुरू हो गया है, जिसे रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा साझेदारी को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। उनकी यात्रा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित निजी रात्रिभोज से होगी, जिसे दोनों नेताओं के बीच अनौपचारिक लेकिन अत्यंत महत्त्वपूर्ण बातचीत का मंच समझा जाता है। यह रात्रिभोज न केवल द्विपक्षीय रिश्तों की गर्मजोशी का प्रतीक है, बल्कि उन मुद्दों पर अग्रिम चर्चा का अवसर भी देता है, जिन पर अगले दिन होने वाली औपचारिक वार्ता में विस्तार से बात की जानी है।
दूसरे दिन पुतिन सबसे पहले राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति भवन में उन्हें औपचारिक स्वागत दिया जाएगा, जहाँ गार्ड ऑफ ऑनर और उच्च-स्तरीय प्रोटोकॉल के साथ उनका अभिनंदन किया जाएगा। इसके बाद पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी हैदराबाद हाउस पहुंचेंगे, जहां दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर वार्ता आयोजित होगी। यह वार्ता भारत-रूस संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण मंच है, जिसमें रणनीतिक साझेदारी के विविध क्षेत्रों पर चर्चा की जाती है। इस बार वार्ता का प्रमुख फोकस व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, कृषि, स्वास्थ्य, विज्ञान-तकनीक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों पर रहेगा।
ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देश कच्चे तेल और गैस आपूर्ति की स्थिरता, उर्वरक आयात, और प्रतिबंधों के बीच सुरक्षित आपूर्ति चैनल बनाए रखने पर चर्चा कर सकते हैं। आर्थिक मोर्चे पर व्यापार को बढ़ावा देने, निवेश सहयोग को सरल बनाने, वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों और बैंकिंग कनेक्टिविटी पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाना है। रूस और भारत के उद्योगपतियों की मौजूदगी में पुतिन भारत–रूस बिज़नेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जहां वे व्यापारिक प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे।
रक्षा सहयोग इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है। हाल ही में रूस की संसद ने भारत के साथ लॉजिस्टिक सपोर्ट संबंधी ‘RELOS’ समझौते को मंजूरी दी है, जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग, आपूर्ति और संयुक्त अभ्यास और अधिक सुगम हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त S-400 मिसाइल प्रणाली की शेष डिलीवरी, सु-30 विमानों का उन्नयन, संयुक्त रक्षा उत्पादन और नई तकनीकी साझेदारियों पर भी विस्तार से बात होने की संभावना है। भारत और रूस दशकों से एक-दूसरे के प्रमुख रक्षा साझेदार रहे हैं, और यह यात्रा उस भरोसे को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भूराजनीतिक दृष्टि से भी यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यूक्रेन संघर्ष, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन के बीच भारत का रूस के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना उसकी विदेश नीति का अहम हिस्सा है। इस यात्रा के माध्यम से भारत यह संदेश भी देता है कि उसकी कूटनीति बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करती है और वह अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप स्वतंत्र निर्णय लेता है।
दौरे के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पुतिन के सम्मान में राजकीय भोज देंगी, जिसके साथ यह उच्च स्तरीय राजनयिक यात्रा संपन्न होगी। उम्मीद है कि इस दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे, जिनका प्रभाव आने वाले वर्षों में भारत–रूस संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगा।




