चायल विधायक पूजा पाल ने केशव प्रसाद मौर्य से लिया आशीर्वाद, भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई हलचल देखी जा रही है, जिसकी वजह सपा से निष्कासित चायल विधानसभा क्षेत्र की विधायक पूजा पाल और राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मुलाकात बनी। प्रयागराज में हुए इस कार्यक्रम में पूजा पाल ने सार्वजनिक रूप से केशव प्रसाद मौर्य के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य देखते ही राजनीतिक माहौल में सवालों और अटकलों की बाढ़ आ गई। लंबे समय से सपा की प्रमुख चेहरों में शामिल रही पूजा पाल का इस तरह भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से नजदीकी दिखाना राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। मुलाकात के दौरान पूजा पाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य उनके लिए अभिभावक की तरह हैं। उन्होंने भावुक होते हुए यह भी कहा कि 18 साल पहले उनके पति की हत्या के बाद उन्हें न्याय दिलाने में योगी सरकार ने जो कदम उठाए, वे उनके परिवार के लिए हमेशा महत्व रखते हैं। इसी कारण, उनके मन में इन नेताओं के लिए सम्मान और कृतज्ञता है।

पूजा पाल को हाल ही में समाजवादी पार्टी से उस समय निष्कासित किया गया था जब उन्होंने खुलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की और सरकारी कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग लेना शुरू कर दिया था। इसी वजह से सपा नेतृत्व ने इसे पार्टी लाइन के खिलाफ आचरण मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की। निष्कासन के बाद से ही पूजा पाल कई बार भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा कर चुकी हैं, जिससे उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगातार मजबूत होती गई हैं। हालांकि, अब तक उन्होंने किसी भी दल में औपचारिक रूप से शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने इतना ही कहा कि वह जनता के विकास के लिए काम कर रही हैं और अपने राजनीतिक निर्णय सोच-समझकर ही लेंगी।

राजनीतिक विशेषज्ञ इस मुलाकात को महज संयोग या औपचारिकता नहीं मानते। प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले किसी विधायक का विपक्ष छोड़कर सत्ता पक्ष के साथ बढ़ती नजदीकियां अक्सर बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत देती हैं। पूजा पाल का सपा से निकलना, फिर भाजपा नेताओं से बार-बार मुलाकात और अब उपमुख्यमंत्री के पैर छूकर आशीर्वाद लेना—इन घटनाक्रमों ने राजनीतिक विश्लेषकों के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कई विशेषज्ञ इसे संभावित राजनीतिक पुनर्संरेखन की शुरुआत मानते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि गृह न्याय के व्यक्तिगत अनुभव ने पूजा को सत्ता पक्ष के प्रति सकारात्मक रूझान की ओर अग्रसर किया है।

स्थानीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम ने माहौल गरमा दिया है। सपा के नेताओं ने इसे पार्टी सिद्धांतों के खिलाफ बताया है और कहा है कि पूजा पाल पहले से ही भाजपा के प्रति अपनत्व दिखा रही थीं। वहीं भाजपा समर्थकों के बीच इसे संभावित ‘बढ़त’ के रूप में देखा जा रहा है। चायल और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पूजा पाल की मजबूत पकड़ होने के कारण उनके हर कदम का सीधा असर स्थानीय राजनीतिक संतुलन पर पड़ता है। यही कारण है कि उनकी एक मुलाकात ने ही चर्चाओं का आकार बढ़ा दिया है।

फिलहाल, पूजा पाल ने अपने भविष्य के निर्णय को स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक माहौल में यह माना जा रहा है कि उनके अगले कदम से प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चाहे वह भाजपा में शामिल हों या स्वतंत्र रास्ता चुनें—उनकी सक्रियता और बयानबाजी इस बात का संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में और भी रोचक घटनाक्रम देखने को मिलेंगे।

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