सैन्य टकराव की आंच तेज—थाई-कंबोडिया सीमा पर गोलीबारी और एयर अटैक जारी

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थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा तनाव एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिख रहा है। सोमवार को थाई वायुसेना ने विवादित सीमा क्षेत्र में कंबोडिया के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसे थाई सेना ने अपने जवानों पर हुई गोलीबारी के जवाब में की गई कार्रवाई बताया। इन झड़पों में एक थाई सैनिक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। थाई अधिकारियों का कहना है कि हालिया फायरिंग कंबोडिया की ओर से की गई, जिसके चलते उन्हें जवाबी कदम उठाने पड़े, हालांकि कंबोडिया ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया है। कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय ने थाई हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और दावा किया कि संघर्ष की शुरुआत उसने नहीं की।

तनाव बढ़ने के साथ सीमा के दोनों ओर नागरिक जीवन पर भी इसका असर दिखने लगा है। कई गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है, जबकि स्थानीय प्रशासन ने स्कूलों को बंद कर दिया है और इमरजेंसी शेल्टर तैयार किए जा रहे हैं। पहले भी सीमा पर हुए संघर्षों के कारण बड़े पैमाने पर पलायन और नुकसान हुआ था, इसलिए प्रशासन इस बार शुरू से ही सतर्कता बरत रहा है। सेना और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर हैं और छोटे-से विवाद के बड़े संघर्ष में बदलने की संभावना को देखते हुए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

यह सीमा विवाद वर्षों पुराना है, जिसका केंद्र ज्यादातर प्रीआह विहेयर मंदिर क्षेत्र और आसपास की जमीन रही है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच शांति वार्ताओं के बाद स्थिति कुछ हद तक शांत हुई थी, लेकिन नए हमलों ने उस नाज़ुक समझौते को झटका दे दिया है। राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व लगातार बयान देकर अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में लगा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जताई जा रही है। दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थिरता, सीमापार व्यापार और मानवीय सुरक्षा पर इसके प्रभाव को देखते हुए कई देशों और संगठनों की नजर इस द्विपक्षीय टकराव पर बनी हुई है।

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका और अधिक अहम हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त निगरानी तंत्र, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता या संवाद प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने जैसे कदम ही इस तनाव को कम कर सकते हैं। लेकिन जमीन पर लगातार जारी गोलीबारी और हवाई हमलों के चलते निकट भविष्य में समाधान मिलना कठिन दिखाई देता है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा, तत्काल राहत और सीमा क्षेत्र में शांति बहाल करना है।

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