संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी। बुधवार को हुई बैठक में भारत ने विशेष रूप से अफगानिस्तान के मामले में पाकिस्तान की नीतियों की जमकर आलोचना की। भारत ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में की गई हालिया गतिविधियों, व्यापार और पारगमन मार्गों को अवरुद्ध करने, तथा हवाई हमलों के माध्यम से नागरिकों की जान लेने की घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जाना चाहिए। भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने कहा कि इन हमलों में निर्दोष नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की मौत हुई है, जो पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं।
हरीश ने इसे केवल स्थानीय संकट नहीं बल्कि व्यापार और पारगमन मार्गों को बाधित करने वाला “ट्रेड और ट्रांजिट टेररिज़्म” बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की सीमा नीतियों ने अफगानिस्तान के आर्थिक जीवन और पुनर्निर्माण प्रयासों को प्रभावित किया है, और यह WTO नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। भारत ने अफगानिस्तान में स्थिरता बनाए रखने और विकास के लिए तालिबान से व्यावहारिक (प्रैगमेटिक) जुड़ाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया, यह कहते हुए कि केवल आरोप-प्रत्यारोप और दंडात्मक उपायों से कोई समाधान नहीं निकलेगा।
इसके साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा घोषित आतंकवादी समूहों को सीमा पार आतंकवाद के लिए उपयोग नहीं करने दिया जाए और ऐसे नेटवर्क को खत्म करने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएँ। भारत ने अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और स्वतंत्रता का समर्थन दोहराया और वहां के लोगों की भलाई के लिए मानवीय तथा विकास संबंधी सहायता जारी रखने का आश्वासन दिया।
इस बैठक में पाकिस्तान ने दावा किया कि अफगान भूमि से उत्पन्न आतंकवाद उसके लिए सबसे बड़ा खतरा है और वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा कर रहा है। पिछले महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर सुरक्षा तनाव बढ़ा है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार हिंसा, हवाई हमलों और व्यापार मार्गों को अवरुद्ध करने के आरोप लगा चुके हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।




