राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर सियासी घमासान, मोदी बनाम ममता आमने-सामने

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पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के दौरे से जुड़े प्रोटोकॉल विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राज्य की Mamata Banerjee सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह घटना केवल राष्ट्रपति का ही नहीं बल्कि देश के संविधान का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा बनाए रखना हर राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में जो हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

यह विवाद उस समय सामने आया जब भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu अपने पश्चिम बंगाल दौरे पर एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं। कार्यक्रम के आयोजन और प्रोटोकॉल को लेकर कई सवाल उठे। रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम स्थल में बदलाव और व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं के कारण राष्ट्रपति ने असंतोष भी जताया। इसके अलावा राज्य सरकार के शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति को लेकर भी चर्चा हुई, क्योंकि आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहते हैं।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति की ओर से व्यक्त की गई पीड़ा ने देश के लोगों को भी दुखी किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है और उसकी गरिमा का सम्मान करना लोकतांत्रिक परंपराओं का अहम हिस्सा है।

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर पलटवार किया। उनका कहना है कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और वास्तविक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार ने कार्यक्रम के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की थीं और इस मामले को बेवजह विवाद बनाया जा रहा है।

राष्ट्रपति के दौरे से जुड़ा यह मुद्दा अब केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है। एक ओर भाजपा इस मामले को संवैधानिक पद की गरिमा से जोड़कर राज्य सरकार की आलोचना कर रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप बताते हुए खारिज कर रही है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सियासी बहस लगातार तेज होती जा रही है।

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