ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए होने वाला चुनाव इस बार काफी रोचक हो गया है। करीब 12 साल बाद ऐसी स्थिति बनी है जब इन सीटों के लिए वास्तविक मतदान होगा, क्योंकि चार सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं और नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना नाम वापस नहीं लिया। इससे पहले कई बार राज्यसभा की सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाते रहे हैं, लेकिन इस बार मुकाबला तय होने से राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को राज्य विधानसभा परिसर में होगा। मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कराया जाएगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 20 मार्च तक पूरी होने की संभावना है। लंबे समय बाद होने वाले इस मुकाबले को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस चुनाव में कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार, बीजू जनता दल (बीजेडी) के संतृप्त मिश्रा और डॉ. दत्तेश्वर होता शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि दिलीप राय को भाजपा का समर्थन प्राप्त है, जिससे चुनाव का समीकरण और दिलचस्प हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में भाजपा को दो सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि बीजेडी के खाते में एक सीट जाने की उम्मीद है। चौथी सीट के लिए मुकाबला कड़ा माना जा रहा है, क्योंकि पांच उम्मीदवारों के मैदान में होने से क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बढ़ गई है। यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी रणनीति को मजबूत बनाने में जुटे हुए हैं।
ओडिशा में राज्यसभा चुनाव का यह मुकाबला राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत भी माना जा रहा है। चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवारों के मैदान में होने से यह चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है और अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम परिणाम किस पार्टी के पक्ष में जाता है।




