पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता के कारण भारत में एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति को लेकर संभावित संकट की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है और गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई स्तरों पर कदम उठा रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अतिरिक्त एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि घरेलू उपभोक्ताओं को किसी तरह की बड़ी परेशानी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठा रही है।
मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी वजह से भारत वैकल्पिक स्रोतों और नए आपूर्ति मार्गों पर भी काम कर रहा है, ताकि देश में एलपीजी की आपूर्ति बाधित न हो। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं, होटल-रेस्तरां और अन्य आवश्यक सेवाओं को समय पर गैस सिलेंडर मिलते रहें।
संभावित संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एलपीजी की आपूर्ति पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है, ताकि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो। कई जगहों पर गैस एजेंसियों और गोदामों की जांच भी शुरू कर दी गई है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति सामान्य बनी रहे।
इसके अलावा सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार देश की रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप दैनिक एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है, लेकिन भारत द्वारा वैकल्पिक आपूर्ति के रास्ते तलाशना और घरेलू उत्पादन बढ़ाना संभावित संकट से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




