राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल 2026 तक Germany के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं, जिसका उद्देश्य भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग को नई दिशा देना और उभरती तकनीकों में साझेदारी को मजबूत करना है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण और “मेक इन इंडिया” के तहत स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। इस दौरे के दौरान रक्षा मंत्री जर्मनी के समकक्ष Boris Pistorius सहित शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे, जहां रक्षा औद्योगिक सहयोग, सैन्य-से-सैन्य संबंधों को मजबूत करने और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी पर व्यापक चर्चा होगी।
वार्ता का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और उन्नत सैन्य प्रणालियों के संयुक्त विकास पर रहेगा। दोनों देश आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलती तकनीकी जरूरतों को देखते हुए इन क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और सह-उत्पादन (co-production) के नए अवसर तलाशेंगे। इसके साथ ही तकनीक हस्तांतरण (technology transfer) और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए “डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप” पर भी चर्चा होने की संभावना है, जो भविष्य के सहयोग का खाका तय कर सकता है।
इस यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना के लिए अत्याधुनिक स्टेल्थ पनडुब्बियों की संभावित खरीद पर भी बातचीत हो सकती है, जिसकी लागत अरबों यूरो में आंकी जा रही है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं। राजनाथ सिंह जर्मनी के रक्षा उद्योग से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, ताकि भारत में निवेश, संयुक्त उत्पादन और तकनीकी साझेदारी को प्रोत्साहन मिल सके।
गौरतलब है कि किसी भारतीय रक्षा मंत्री का यह जर्मनी दौरा लगभग सात वर्षों बाद हो रहा है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि AI, ड्रोन और हाई-टेक सैन्य प्रणालियों में सहयोग के जरिए भारत की भविष्य की सैन्य क्षमताओं को भी नई गति देगी।



