चुनावी माहौल चरम पर: तमिलनाडु में प्रचार खत्म, बंगाल में गरमाई सियासत

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तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए प्रचार का शोर आज थम जाएगा, जिसके साथ ही निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 48 घंटे का साइलेंस पीरियड लागू हो जाएगा। राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए बड़े पैमाने पर रैलियां, रोड शो और जनसभाएं आयोजित की गईं। यह चुनाव राज्य की सत्ता के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जिसमें सभी प्रमुख दल जीत का दावा कर रहे हैं।

सत्तारूढ़ Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) अपनी सरकार की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं के आधार पर दोबारा सत्ता में लौटने का भरोसा जता रही है। वहीं विपक्षी All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) और Bharatiya Janata Party (BJP) राज्य में सत्ता परिवर्तन की उम्मीद के साथ आक्रामक प्रचार अभियान चला रहे हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी भी तेज हो गई है, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरमा गया है।

निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले सभी प्रकार के प्रचार-प्रसार पर रोक लग जाती है, ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से अपना फैसला कर सकें। इसी क्रम में राज्य में ‘ड्राई डे’ लागू किया गया है, जिसके तहत शराब की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा। मतदान के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है, जिससे अधिक से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। इसके साथ ही बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि समावेशी और सुगम मतदान सुनिश्चित किया जा सके।

वहीं West Bengal में भी चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है। यहां Bharatiya Janata Party (BJP) ने पूरी ताकत झोंकते हुए चुनाव प्रचार को तेज कर दिया है। पार्टी के शीर्ष नेता लगातार रैलियां और रोड शो कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। अन्य दल भी पीछे नहीं हैं और अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं को साधने में जुटे हैं।

कुल मिलाकर, तमिलनाडु में प्रचार थमने के साथ अब सभी की नजरें 23 अप्रैल को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेगा। वहीं पश्चिम बंगाल में जारी तेज चुनावी अभियान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे न केवल संबंधित राज्यों की राजनीति को प्रभावित करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

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