‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर बढ़े सियासी विवाद के बीच Bharatiya Janata Party (भाजपा) ने राजधानी लखनऊ में ‘जन आक्रोश महिला पद यात्रा’ निकालकर विपक्ष के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी का आरोप है कि महिला आरक्षण से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित होने से रोकने में विपक्षी दलों की भूमिका रही है, जिसके कारण महिलाओं में आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस पद यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया, जिससे यह एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में उभरी।
यह पद यात्रा मुख्यमंत्री आवास से शुरू होकर विधानसभा तक पहुंची, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने विपक्षी दलों—विशेषकर सपा और कांग्रेस—पर तीखे हमले किए और आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने में बाधा डाली है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने भी विपक्ष के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं में व्यापक असंतोष है और इसका असर आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा।
पद यात्रा के दौरान ‘देख सपाई बिटिया घबराई’ जैसे नारे भी गूंजे, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। भाजपा नेताओं ने इसे महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बताया, जबकि विपक्ष पर महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने यह भी कहा कि यह आंदोलन केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि सपा, कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके जैसी पार्टियों का रवैया महिलाओं के प्रति नकारात्मक रहा है और यह पद यात्रा उसी जनभावना का प्रतीक है, जो आज देशभर में दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की “आधी आबादी” अपने अधिकारों के लिए खड़ी है और यह आंदोलन आने वाले समय में राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा। कुल मिलाकर, भाजपा की यह ‘जन आक्रोश महिला पद यात्रा’ महिला आरक्षण के मुद्दे पर बढ़ते राजनीतिक टकराव और जनभावनाओं को दर्शाती है, जिसने प्रदेश की राजनीति को और अधिक गरमा दिया है।



