राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह का आयोजन नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस ऐतिहासिक अवसर पर संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले भी उपस्थित रहे। समारोह में प्रधानमंत्री ने RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर विशेष स्मारक डाक टिकट और ₹100 का स्मारक सिक्का जारी किया, जो संघ की अब तक की यात्रा, उसके योगदान और प्रतीकों को दर्शाता है।
स्मारक सिक्के की मेटल संरचना शुद्ध चाँदी (99.9 %) की है और इसका आकार लगभग 44 मिमी व्यास तथा वजन 40 ग्राम है। सिक्के के अग्र भाग (ओबवर्स) पर अशोक स्तंभ और “सत्यमेव जयते” लिखा होगा, साथ ही “भारत” और “INDIA” तथा “₹100” अंकित होंगे। रिवर्स भाग पर “भारत माता” की छवि, तीन स्वयंसेवक की मुद्रा और वर्ष “1925–2025” अंकित होंगे, साथ ही “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष” और “100 Years of Rashtriya Swayamsevak Sangh” लिखा जाएगा। इसके अतिरिक्त, संस्कृत में “राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम” का उल्लेख किया गया है, जो संघ की संस्कृति और आदर्शों को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि RSS की 100 वर्ष की यात्रा अद्भुत, अभूतपूर्व और प्रेरक रही है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ की स्थापना का समय (विजयदशमी) सादृश्य नहीं है और यह राष्ट्रीय चेतना और संस्कृति की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संघ ने हमेशा समाज और राष्ट्र की सेवा में योगदान दिया है और उसके आदर्श आज भी देश के लिए मार्गदर्शक हैं। संघ सरकार्यवाह होसबाले ने बताया कि RSS कभी किसी का विरोधी नहीं रहा, और संघ की पहचान उसके योगदान और सेवा से होती है, किसी प्रमाण-पत्र से नहीं।
RSS का शताब्दी वर्ष 2 अक्टूबर 2025 को विजयदशमी से शुरू होकर 20 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान सात बड़े कार्यक्रम, देशव्यापी “घरो-घरी जनसंपर्क” अभियान, विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, राज्य और नगर स्तर के सम्मेलन, जन गोष्ठियाँ और शाखा विस्तार गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी। नागपुर में 2 अक्टूबर को RSS स्थापना दिवस की स्मरणीय वर्षगाँठ पर विशेष आयोजन होंगे।
यह शताब्दी समारोह RSS के सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव को मान्यता देने का प्रतीक है। प्रधानमंत्री द्वारा डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी करना इस संस्था की प्रासंगिकता और सार्वजनिक जीवन में उसके योगदान को उजागर करता है। इस अवसर ने न केवल संघ के 100 वर्षों के योगदान को सम्मानित किया, बल्कि भारतीय समाज में इसके आदर्शों और भूमिका पर नई बहस को भी प्रेरित किया है।




