भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अक्टूबर 2025 की बैठक में रेपो रेट में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की। समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर ही बनाए रखा जाए। इस फैसले का सीधा मतलब है कि फिलहाल आम लोगों के लोन की ईएमआई पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
क्यों लिया गया यह निर्णय
बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था संतुलित गति से आगे बढ़ रही है और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के संकेत दिख रहे हैं। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ अभी भी अनिश्चित हैं और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे कारक भारतीय बाज़ार को प्रभावित कर सकते हैं। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फिलहाल रेपो रेट को जस का तस रखने का फैसला किया गया।
विकास और महंगाई का अनुमान
मौद्रिक नीति समिति ने 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, खुदरा महंगाई दर (CPI) के अनुमान को थोड़ा घटाया गया है। यह संकेत है कि अर्थव्यवस्था में मजबूती दिख रही है और महंगाई धीरे-धीरे नियंत्रण में है।
आम जनता पर असर
रेपो रेट स्थिर रहने का सबसे सीधा असर उन लोगों पर है जिनके पास पहले से होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन चल रहे हैं। उनकी मासिक किस्त (EMI) पहले जैसी ही बनी रहेगी। वहीं, नए कर्ज लेने वालों के लिए भी फिलहाल ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। यानी उपभोक्ताओं के लिए यह निर्णय त्योहारी सीजन में राहत देने वाला है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई ने यह कदम संतुलन साधने के लिए उठाया है। एक तरफ जहां महंगाई धीरे-धीरे काबू में आती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर अर्थव्यवस्था में तेज़ी भी दिखाई दे रही है। ऐसे में जल्दबाज़ी में ब्याज दर बदलना उचित नहीं होता। अगर भविष्य में वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा झटका लगता है या कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं, तो आने वाली बैठकों में आरबीआई को दरों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
बाज़ार और निवेशकों की प्रतिक्रिया
रेपो रेट स्थिर रहने के इस फैसले का असर शेयर बाज़ार और बांड मार्केट पर मामूली रूप से देखा गया। निवेशकों का मानना है कि फिलहाल स्थिर ब्याज दर से वित्तीय बाज़ार में स्थिरता बनी रहेगी। वहीं, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए भी यह स्थिति संतुलित मानी जा रही है।
निष्कर्ष
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति का यह निर्णय आम जनता और कारोबारियों दोनों के लिए राहत भरा है। इससे न केवल लोन की ईएमआई स्थिर रहेगी बल्कि निवेशकों को भी विश्वास मिलेगा कि अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ और घरेलू आर्थिक संकेतक ही तय करेंगे कि अगली बैठक में ब्याज दरों का रुख क्या होगा।




