मुलायम युग की टाउनशिप नीति का पुनरुद्धार — योगी सरकार ने संशोधनों को हरी झंडी दी

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उत्तर प्रदेश की सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उन टाउनशिप परियोजनाओं को पुनर्जीवित करने का रास्ता साफ कर दिया है जो वर्षों से अटकी पड़ी थीं। बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा शुरुआती दिनों में घोषित इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति में संशोधन को मंजूरी दे दी गई, जिससे कुल 40 में से 28 लंबित परियोजनाओं को फिर से सक्रिय करने का अवसर मिलेगा। वर्तमान संशोधनों का लक्ष्य निजी निवेशकों की जमीन जुटाने और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में आ रही प्रक्रियात्मक चुनौतियों को दूर करना है।

सबसे महत्वपूर्ण संशोधनों में न्यूनतम भूमि सीमा में ढील शामिल है। पहले टाउनशिप विकसित करने के लिए कम-से-कम 25 एकड़ जमीन अनिवार्य थी, जिसे अब घटाकर 12.50 एकड़ पर भी अनुमति दे दी गई है। सरकारी तर्क यह है कि इससे छोटे और मध्यम आकार के डेवलपर्स भी टाउनशिप मॉडल अपनाकर सुनियोजित आवास और बुनियादी ढांचा विकसित कर सकेंगे, जिनके बिना कई इलाकों में विकास रुका हुआ था। साथ ही नीति में यह लचीलापन भी दिया गया है कि परियोजना के आसपास की लगभग 10 प्रतिशत अतिरिक्त भूमि को समेकित करते हुए परियोजना का लेआउट अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

कैबिनेट ने यह निश्चय भी किया कि पहले से स्वीकृत डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में आवश्यकतानुसार संशोधन की अनुमति दी जाएगी ताकि बदलते आर्थिक और तकनीकी हालात के हिसाब से परियोजनाओं को अनुकूलित किया जा सके। साथ ही अटकी परियोजनाओं के लिए समय-सीमा में ढील देने का प्रावधान किया गया है ताकि जिन प्रोजेक्ट्स की कार्यवाही किसी न किसी वजह से ठप पड़ी थी, उन्हें पुनः चालू करने के लिए आवश्यक समय और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। इन संशोधनों के बाद सरकार ने उन सात परियोजनाओं को निरस्त करने का भी निर्णय लिया जिनमें किसी प्रकार की वास्तविक प्रगति नहीं हुई थी, जबकि शेष 28 को नई पॉलिसी के तहत प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकार का दावा है कि यह पहल आवासीय माँग को पूरा करने के साथ-साथ शहरों के सुनियोजित विस्तार, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। रियल एस्टेट सेक्टर और डेवलपर्स ने इस कदम का स्वागत किया है क्योंकि कम भूमि पर भी टाउनशिप विकसित करने की अनुमति मिलने से निवेश व्यवहार्य होगा और धन प्रवाह जल्द वापस आने की सम्भावना बढ़ेगी। वहीं शहरी नियोजन विशेषज्ञों और पर्यावरणवादियों ने यह भी संकेत दिया है कि नीति लागू करते समय हरित क्षेत्र, खुली जगहों, पानी और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं का संतुलन बनाए रखना अनिवार्य होगा ताकि तेज़ विकास शहरी जीवन की गुणवत्ता के लिए हानिकारक न सिद्ध हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे आकार की टाउनशिपों में भी यदि पर्याप्त सार्वजनिक सुविधाएँ, बहुमुखी ट्रांज़िट कनेक्टिविटी और हरित क्षेत्र जोड़े जाएं तो ये प्रोजेक्ट्स आर्थिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से लाभदायक हो सकते हैं। वहीं सरकारी स्तर पर पारदर्शिता, समयबद्ध मंजूरी प्रक्रियाओं और निगरानी तंत्र को मजबूत करना भी उतना ही आवश्यक होगा, ताकि परियोजनाओं में देरी और कानूनी जटिलताएँ फिर से उत्पन्न न हों।

अधिसूचना जारी होने के पश्चात् ही संशोधित नीति लागू मानी जाएगी और अधिकारियों का मानना है कि जल्द ही कई वर्षों से ठहरे हुए प्रोजेक्टों में काम शुरू होते दिखेगा। यदि यह प्रयत्न सफल रहा तो प्रदेश में आवासीय सुविधाओं का एक बड़ा हिस्सा व्यवस्थित तरीके से विकसित करके सामान्य नागरिकों तक सुलभ कराना संभव होगा, साथ ही निवेशकों के लिए भी उत्तर प्रदेश एक आकर्षक गंतव्य बनकर उभर सकता है।

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