अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कैरिबियन सागर में हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक कड़े बयान में कहा है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो अमेरिका वेनेजुएला पर “जमीन पर भी” सैन्य हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप के इस बयान ने पहले से मौजूद भू-राजनीतिक तनाव को और उभारा है, क्योंकि अमेरिका बीते कुछ महीनों से कैरिबियन क्षेत्र में अपने सैन्य अभियानों को तेज कर चुका है।
जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने सितंबर से कैरिबियन सागर में कई हवाई और समुद्री कार्रवाई की है, जिनमें संदिग्ध ड्रग-तस्करी नेटवर्क को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। इन अभियानों में कई बार सशस्त्र टकराव की नौबत आई और विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में दर्जनों लोगों की मौत हुई। अमेरिका का तर्क है कि ये अभियान सीमापार मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक हैं, लेकिन मानवाधिकार समूह और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और पारदर्शिता के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे हमलों में नागरिकों के मारे जाने का खतरा बढ़ जाता है और इन अभियानों को लेकर विश्वसनीय सबूत भी सार्वजनिक नहीं किए गए।
कैरिबियन के कई छोटे देशों ने भी अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। कुछ द्वीपीय राष्ट्रों का कहना है कि अमेरिका की बढ़ती सैन्य उपस्थिति क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है और इससे संप्रभुता से जुड़ी चिंताएँ बढ़ रही हैं। खास तौर पर ट्रिनिडाड और टोबैगो जैसे देशों ने हाल की सैन्य तैनाती पर असंतोष जताया है। इन देशों का मानना है कि अमेरिका की आक्रामक कार्रवाई उन्हें अनचाहे भू-राजनीतिक तनाव में धकेल सकती है।
वहीं, वेनेजुएला ने अमेरिकी आरोपों और संभावित हमलों को सिरे से खारिज किया है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार ने चेताया है कि किसी भी बाहरी सैन्य हस्तक्षेप को वेनेजुएला अपनी संप्रभुता के खिलाफ हमला मानेगा और इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। वेनेजुएला का दावा है कि अमेरिका क्षेत्रीय राजनीति में दबाव बनाकर हस्तक्षेप की राह तलाश रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध है। पड़ोसी देश भी स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं और कई देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने की अपील की है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी चेतावनी, वेनेजुएला का प्रत्युत्तर, और कैरिबियन क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बढ़ते साए ने लैटिन अमेरिकी भू-राजनीति को संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विवाद जमीन-आधारित सैन्य कार्रवाई तक पहुँचता है तो इसका असर क्षेत्रीय राजनीति, मानवाधिकार स्थिति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गंभीर और दीर्घकालिक होगा।




