नए साल की पूर्व संध्या पर काशी और वृंदावन में भक्तों की भारी भीड़, प्रशासन ने उठाए विशेष कदम

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उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में नए साल 2026 के अवसर पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है। खासकर काशी के विश्वनाथ धाम और वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़ ने प्रशासन की तैयारियों को और कड़ा कर दिया है। वाराणसी में होटल और धर्मशालाएँ पहले ही “हाउसफुल” हो चुकी हैं और हर ओर श्रद्धालुओं की कतारें देखी जा रही हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण के लिए सुरक्षा चौकियों और पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अलावा प्रशासन ने 24 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक ‘स्पर्श दर्शन’ पर पूरी तरह रोक लगाई है, ताकि सभी भक्त केवल दूर से ही भगवान का दर्शन कर सकें। इस अवधि में VIP और प्रोटोकॉल दर्शन सुविधाएँ भी रद्द कर दी गई हैं, ताकि दर्शन प्रक्रिया सभी श्रद्धालुओं के लिए समान और सुरक्षित बनी रहे। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए वाराणसी में कई मार्गों पर वाहनों की एंट्री प्रतिबंधित कर दी गई है और कुछ मार्गों में रूट डायवर्जन लागू किया गया है।

वृंदावन‑मथुरा में भी नए साल की पूर्व संध्या पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब बढ़ा है। प्रशासन ने भारी वाहनों सहित प्रवेश पर रोक लगाई है और छोटे वाहनों को भी केवल मंज़ूरशुदा मार्गों पर ही प्रवेश की अनुमति दी गई है, ताकि भीड़‑भाड़ वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम न हो। इसके साथ ही पुलिस और मंदिर प्रबंधन ने पार्किंग, स्वास्थ्य सुविधाएँ और सुरक्षा व्यवस्थाएँ मज़बूत कर दी हैं। मंदिरों में प्रवेश के नियम और भीड़‑व्यवस्था के दिशा‑निर्देश भक्तों को सूचित किए गए हैं, ताकि पूजा‑अर्चना सुचारू और सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके।

प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों जैसे अयोध्या, कानपुर और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी भक्तों का उत्साह देखने को मिल रहा है। लाखों लोग नए साल पर भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरों में दर्शन कर रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा, दर्शन नियमों और ट्रैफिक नियंत्रण जैसे उपायों को और कड़ा किया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इस प्रकार उत्तर प्रदेश के तीर्थ स्थलों पर नए साल से पहले ही भक्तों की भीड़ और प्रशासन की तैयारियों का एक अद्भुत दृश्य सामने आया है।

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