आगामी संघीय बजट 2026-27 को लेकर देश के उद्योग जगत, आर्थिक विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं की निगाहें टिकी हुई हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ते टैरिफ संकट और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच यह बजट भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रखने, निर्यात को मजबूती देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाने वाला यह बजट ऐसे समय आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था दबाव में है और भारत को अपने घरेलू व बाहरी मोर्चों पर संतुलन साधने की जरूरत है।
वैश्विक व्यापार परिदृश्य में अमेरिका और अन्य विकसित देशों द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने से भारत के निर्यात-आधारित क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वस्त्र, चमड़ा, कृषि उत्पाद और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर सीधे तौर पर इस चुनौती से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में बजट से उम्मीद है कि वह निर्यातकों को राहत देने के लिए नई प्रोत्साहन योजनाओं, सस्ती वित्तीय सहायता और लॉजिस्टिक्स लागत घटाने वाले उपायों की घोषणा करेगा, ताकि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहें।
बजट में निर्यात और रोजगार सृजन को केंद्र में रखे जाने की संभावना है। खासकर श्रम-प्रधान उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर के लिए विशेष पैकेज की मांग उठ रही है। छोटे और मध्यम उद्योगों को आसान कर्ज, टैक्स राहत और तकनीकी सहयोग मिलने से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि लाखों नए रोजगार के अवसर भी सृजित हो सकते हैं। इसके साथ ही स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देकर सरकार घरेलू मांग को भी मजबूत करना चाहती है।
आर्थिक मोर्चे पर भारत की विकास दर को लेकर संकेत सकारात्मक बने हुए हैं। आरबीआई और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक सुस्ती के बावजूद अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है। ऐसे में बजट से उम्मीद की जा रही है कि वह इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल अर्थव्यवस्था और निवेश-आधारित विकास को प्राथमिकता देगा, जिससे जीडीपी ग्रोथ को स्थिर गति मिल सके।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को टैरिफ संकट से निपटने, निर्यात बढ़ाने, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास की निरंतरता सुनिश्चित करने वाला बजट माना जा रहा है। यदि सरकार संतुलित नीतियों और व्यावहारिक फैसलों के साथ आगे बढ़ती है, तो यह बजट न केवल मौजूदा चुनौतियों का समाधान करेगा, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।




