उत्तर प्रदेश में युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने वाली मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक सामने आई है। योजना से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत दिए गए कुल ऋण में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी ओबीसी वर्ग के युवाओं की है। इसके अलावा अनुसूचित जाति (एससी) के लगभग 14.5 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के करीब 0.3 प्रतिशत युवाओं को भी इस योजना का लाभ मिला है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वरोजगार की दिशा में सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के युवाओं की रुचि तेजी से बढ़ रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 7 मार्च तक मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 1.23 लाख से अधिक युवाओं को करीब 14,775 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत युवाओं को बैंक के माध्यम से आसान शर्तों पर ऋण दिया जाता है, जिससे वे छोटे उद्योग, सेवा क्षेत्र या अन्य प्रकार के स्वरोजगार से जुड़े व्यवसाय शुरू कर सकें।
उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि युवाओं को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना शुरू की गई है, ताकि युवा खुद का कारोबार शुरू कर सकें और रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने वाले बनें। योजना के जरिए प्रदेश में उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना में ओबीसी युवाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी यह संकेत देती है कि अब पिछड़े वर्गों के युवा भी बड़े पैमाने पर उद्यमिता की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में इस तरह की योजनाएं न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगी बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूत करेंगी।




