प्रधानमंत्री सस्पेंड, विरोध की लहर, फिर भी बना हनीमून डेस्टिनेशन — थाईलैंड क्यों चर्चा में है?

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एक ऐसा देश जो भारतीय टूरिस्ट और हनीमून कपल्स की पहली पसंद बन चुका है…
लेकिन फिलहाल ये देश चर्चा में है एक बड़े राजनीतिक भूचाल की वजह से।


 पहली बड़ी खबर – थाई प्रधानमंत्री सस्पेंड

थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैटोंगटर्न शिनावात्रा को देश की संविधान अदालत ने निलंबित कर दिया है।
उन पर आरोप है कि उन्होंने एक लीक ऑडियो कॉल में कैम्बोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन को “अंकल” कहकर संबोधित किया, और उन्हें मदद का वादा किया।
इस कॉल के सामने आने के बाद 36 सीनेटरों ने उनके खिलाफ याचिका दायर की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।


 सड़कों पर गूंजा विरोध

इस फैसले के बाद थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए
विरोध कर रहे लोग पीएम को “देशद्रोही” कह रहे हैं।
“तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए जा रहे हैं।
वहीं सरकार ने डिप्टी प्रधानमंत्री सुरिया जुआंगरूंगरुइंगकिट को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया है।


 कैम्बोडिया से बढ़ता तनाव

लीक कॉल सिर्फ थाई राजनीति में ही हलचल नहीं मचा रही,
बल्कि इसके चलते पड़ोसी देश कैम्बोडिया से भी रिश्तों में तनाव पैदा हो गया है।
कुछ समय पहले सीमा पर एक सैनिक की मौत के बाद दोनों देशों के बीच माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था।


 पर्यटन पर नहीं पड़ा असर – भारत में थाईलैंड बना हनीमून हब

राजनीतिक संकट और अंतरराष्ट्रीय विवादों के बावजूद,
थाईलैंड भारत के लिए हनीमून ड्रीम डेस्टिनेशन बना हुआ है।

MakeMyTrip की रिपोर्ट के अनुसार, थाईलैंड ने मालदीव को पछाड़ते हुए
2024-25 में भारत का सबसे पसंदीदा इंटरनेशनल हनीमून डेस्टिनेशन बन गया है।

कोह समुई से फुकेत तक – भारतीयों की पसंद

कोह समुई, फुकेत और क्राबी जैसे तटीय शहर भारतीय जोड़ों में खासे लोकप्रिय हैं।
इसके पीछे कारण हैं:

  • आसान ई-वीज़ा व्यवस्था

  • बजट फ्रेंडली लक्ज़री होटल

  • भारतीय भोजन की उपलब्धता

  • और शानदार समुद्र तटों का रोमांच

  • 5.2% की बुकिंग ग्रोथ

    MakeMyTrip की रिपोर्ट कहती है कि पिछले साल के मुकाबले थाईलैंड के लिए
    हनीमून बुकिंग में 5.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • निष्कर्ष: सियासी संकट बनाम सैलानी मोहब्बत

    एक ओर सियासी संकट से जूझ रहा है थाईलैंड,
    दूसरी ओर, भारतीयों के लिए ये देश अब भी सबसे खास बना हुआ है।
    सवाल यही है — क्या थाईलैंड अपनी राजनीतिक स्थिरता बनाए रख पाएगा,
    या ये हनीमून डेस्टिनेशन एक बार फिर बन जाएगा इंटरनेशनल हैडलाइन्स का केंद्र?


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