सरकारी नहीं, अब प्राइवेट सेक्टर में भी योगी सरकार दिलाएगी नौकरी।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ को हरी झंडी दिखाई है, जिसके तहत एक लाख युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी और 25–30 हजार युवाओं को विदेश में रोजगार मिलने की योजना है। यूपी सरकार ने कैबिनेट की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ की मंज़ूरी दी है।
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि इस मिशन के तहत:

देश में निजी कंपनियों के माध्यम से सालाना लगभग 1 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा ।
साथ ही, 25–30 हजार युवाओं को विदेशों (जैसे इज़रायल, जर्मनी, जापान, खाड़ी देश) में भेजा जाएगा।
कैसे काम करेगा मिशन?”

सरकार खुद रिक्रूटिंग एजेंट (RA) का लाइसेंस लेगी, ताकि बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता खत्म हो।
मिशन का संचालन 5‑स्तरीय समिति द्वारा होगा, जिसमें शामिल हैं: शासी परिषद, राज्य संचालन समिति, राज्य कार्यकारिणी, जिला समितियाँ, और प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट।
इसके अलावा, प्रमुख गतिविधियाँ होंगी:
रोजगार माँग (देश–विदेश) का सर्वे
कंपनियों से सीधे संपर्क
स्किल गैप की पहचान और प्रशिक्षण
भाषा एवं प्री‑डिपार्चर ट्रेनिंग
करियर काउंसलिंग, कैंपस प्लेसमेंट
नियुक्ति के बाद सहयोग और निगरानी।

अनिल राजभर ने बताया, “अब सरकार खुद RA लाइसेंस लेकर युवाओं को विदेश भेजेगी।” उन्होंने आगे कहा कि पैरा‑मेडिकल, नर्सिंग, ड्राइविंग, घरेलू और कुशल श्रम जैसे मांग वाले क्षेत्रों में युवाओं को काम मिलेगा।
महिला श्रमिकों के लिए भी बड़ा बदलाव:
कैबिनेट ने फैक्ट्री नियमों में भी संशोधन किया है। अब 29 खतरनाक श्रेणियों तक महिलाएँ काम कर सकेंगी, जो पहले प्रतिबंधित थीं।
विस्तार और अर्थव्यवस्था पर असर:
यू.पी. को ‘ग्लोबल HR हब’ बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका मकसद सरकार का वादा — “हर हाथ को काम, हर हुनर को सम्मान” — आखिरकार धरातल पर उतारना है।
इसके अलावा, लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे व NSG हब जैसी अन्य योजनाएँ भी कैबिनेट की मंज़ूरी में शामिल हैं।
यूपी रोजगार मिशन युवाओं के लिए उम्मीद लेकर आया है—देश-विदेश में रोज़गार, स्किलिंग, और महिलाओं को ज्यादा मौके। देखते हैं इसके असर प्रदेश में किस तरह दिखते हैं।

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